तनोट माता मंदिर – पाकिस्तान ने यहां गिराए हजारों बम, लेकिन एक भी नहीं फटा

तनोट माता का मंदिर, जैसलमेर के थार रेगिस्तान में 120 km दूरी पर भारत और पााकिस्तान के बार्डर के पास तनोट गांव में स्थित हैं। यहां से पाकिस्तान बॉर्डर मात्र 20 km दूर है। यहां देवी के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और वही पुण्य मिलता है जो माता हिंगलाज मंदिर{बलूचिस्तान, पाकिस्तान} में दर्शन से मिलता है। चारण कुल में जन्मी देवी आवड़ को तनोट माता के नाम से जाना जाता है। तनोट माता को हिंगलाज माँ का ही एक रूप कहा जाता है। हिंगलाज माता जो वर्तमान में बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में ,स्थापित है।

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Varanasi – City of Lord Shiva | वाराणसी – भगवान शिव की नगरी

वाराणसी भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का प्रसिद्ध नगर है। वाराणसी संसार के प्राचीनतम बसे शहरों में से एक शहर है। इसे ‘बनारस’ और ‘काशी’ भी कहते हैं। इसे हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पवित्र नगरों में से एक माना जाता है और इसे अविमुक्त क्षेत्र कहा जाता है। ये हिन्दुओं की पवित्र सप्तपुरियों में से एक है। वाराणसी का उल्लेख स्कंद पुराण, रामायण एवं महाभारत सहित प्राचीनतम ऋग्वेद सहित कई हिन्दू ग्रन्थों में आता है। पौराणिक मान्यताओं के तहत वरुणा और असि नदी के बीच बसे शहर को ही वरुणोसि” कहा गया जिसका अपभ्रंश है वाराणसी। ये नदियाँ गंगा नदी में क्रमशः उत्तर एवं दक्षिण से आकर मिलती हैं। यहां भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर विद्यमान है।

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सारनाथ, एक पवित्र बौद्ध स्थल

वाराणसी से 10 किमी की दूरी पर स्थित, सारनाथ एक महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। बोध गया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने यहाँ अपना पहला धर्मोपदेश दिया था। उनका पहला धर्मोपदेश महा धर्मचक्रप्रवर्तन के रूप में पवित्र है, जिसका अर्थ है ‘धर्म चक्र की गति’। आज सारनाथ बौद्ध पंथ के मुख्य स्थलों में से एक है, जो दुनिया भर से अनुयायियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। शहर मठ, स्तूप और एक संग्रहालय के साथ सुशोभित है। सारनथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थों में से एक है। सारनाथ के अलावा लुम्बिीनी, बोधगया और कुशीनगर तीन अन्य प्रमुख तीर्थ है।

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Ramnagar Fort, Varanasi | रामनगर किला, वाराणसी

रामनगर का किला वाराणसी के रामनगर में गंगा नदी के पूर्वी तट पर तुलसी घाट के सामने स्थित है। यह किला मक्खन के रंग वाले मिर्जापुर के चुनार के बालूपत्थर ने बना है। यह वाराणसी से 14km और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से 2km की दूरी पर स्थित है। गंगा नदी के किनारे बने इस किले का निर्माण सन 1750 में काशी नरेश बलवंत ने करवाया था। ये किला हमेशा से ही काशी के राजाओं का निवास स्थान रहा है, वर्तमान में भी काशी नरेश अनंत नारायण सिंह यहाँ रहते है। किले के जिस भाग में वर्तमान काशी नरेश रहते है वहाँ आम लोगों के जाने पर पाबंदी है।

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Mysterious & Talismanic Fort of Chunar | चुनार का रहस्यमयी और तिलिस्मी किला

चुनार का किला उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के चुनार में स्थित है। जो वाराणसी शहर से लगभग 28km की दूरी पर दक्षिण पश्चिम में स्थित है। यह किला विंध्याचल की पहाड़ियों में गंगा नदी के तट पर है। यह किला लगभग 5000  वर्षों का इतिहास सहेजे हुए है। चुनार का प्राचीन नाम ‘चरणाद्रि’ था। जिस पहाड़ी पर यह किला स्थित है उसकी बनावट मानव के पांव के आकार की है। इसलिए इसे चरणाद्रिगढ़ के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि इस पर्वत पर कई तपस्वियों ने तप किए। यह किला भगवान बुद्ध के चातुर्मास नैना योगीनी के योग का भी गवाह है। नैना योगीनी के कारण ही इसका एक नाम नैनागढ़ भी है।

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Manikarnika Ghat, Varanasi | मणिकर्णिका घाट, वाराणसी

मणिकर्णिका घाट वाराणसी में गंगानदी के तट पर स्थित एक प्रसिद्ध घाट है। वाराणसी के पंच तीर्थों में से एक यह घाट सृजन और विध्वंस का प्रतीक है। यह घाट अंत्येष्टि के लिए प्रसिद्ध है। इसे महाश्मशान घाट भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार होता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मणिकर्णिका घाट के बारे में कहा जाता है कि यहां स्थित श्मशान घाट पर 24 घंटे चिताएं जलती रहती हैं। इस घाट पर उत्तर प्रदेश ही नहीं अन्य प्रदेशों से भी शवों को मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से अंतिम संस्कार के लिए लाया जाता है।

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