MahaLaxmi Temple, Mumbai | महालक्ष्मी मंदिर, मुंबई

ब्रह्मा, विष्णु ,महेश की तरह हिन्दू धर्म में देवी लक्ष्मी प्रमुख देवी देवतायों में से एक हैं, जिन्हें धन धान्य की देवी माना जाता है। महालक्ष्मी की पूजा घर और कारोबार में सुख और समृद्धि लाने के लिए की जाती है। भारत में देवी लक्ष्मी को समर्पित कई मंदिर है, जहां देवी लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। जहां उनके भक्त धन-सम्रद्धि की मन्नते मांगने पहुंचते हैं। इन्हीं मंदिरों में से एक है, महाराष्ट्र के मुंबई शहर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर। मुंबई शहर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर मुंबई के सर्वाधिक प्राचीन धर्मस्थलों में से एक है। यह मंदिर समुद्र के किनारे बी. देसाई मार्ग पर स्थित है। समुद्र के किनारे बसा होने की वजह से मंदिर की सुन्दरता और बढ़ जाती है।

देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहाँ आने वाले हर भक्त का यह दृढ़ विश्वास होता है कि माता उनकी हर इच्छा जरूर पूरी करेंगी। नवरात्रि के त्योहारों के दौरान मंदिर में माता के दर्शन के लिए लोगों को अपनी बारी का घंटों इंतजार करना पड़ता है। यह मंदिर अत्यंत सुंदर, काफी अद्भुत,और लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।  मंदिर के मुख्य द्वार पर भी सुंदर नक्काशी है। यहाँ मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी, महाकाली एवं महासरस्वती तीनों देवियों की प्रतिमाएँ एक साथ विद्यमान हैं। तीनों प्रतिमाओं को सोने एवं मोतियों के आभूषणों से सुसज्जित किया गया है।

महालक्ष्मी मंदिर का इतिहास –
Mahalaxmi Temple History –

मंदिर का इतिहास अत्यंत रोचक है। बताया जाता है कि बहुत समय पहले मुंबई में वर्ली और मालाबार हिल को जोड़ने के लिए दीवार का निर्माण कार्य चल रहा था। सैकड़ों मजदूर इस दीवार के निर्माण कार्य में लगे हुए थे, मगर हर दिन कोई न कोई बाधा आ रही थी। इसके कारण ब्रिटिश इंजीनियर काफी परेशान हो गए। इतनी मेहनत के बावजूद दीवार खड़ी नहीं हो पा रही थी। कई बार तो पूरी की पूरी दीवार ढह गई। समस्या का कोई समाधान नहीं मिल रहा था।

इसी बीच इस प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता रामजी शिवाजी ने एक अनोखा सपना देखा। सपने में मां लक्ष्मी प्रकट हुईं और कहा कि वर्ली में समुद्र के किनारे मेरी एक मूर्ति है। उस मूर्ति को वहां से निकालकर समुद्र के किनारे ही मेरी स्थापना करो। ऐसा करने से हर बाधा दूर हो जाएगी और वर्ली-मालाबार हिल के बीच की दीवार आसानी से खड़ी हो जाएगी।

मुख्य अभियंता को काफी आश्चर्य हुआ। उसने मजदूरों को स्वप्न में बताए गए स्थान पर जाने को कहा और मूर्ति ढूंढ लाने का आदेश दिया। आदेशानुसार कार्य शुरू हुआ। थोड़ी मेहनत के बाद ही महालक्ष्मी की एक भव्य मूर्ति प्राप्त हुई। यह देखकर स्वप्न पाने वाले अभियंता का शीश नतमस्तक हो गया।

माता के आदेशानुसार समुद्र किनारे ही उस मूर्ति की स्थापना की गई और छोटा-सा मंदिर बनवाया गया। मंदिर निर्माण के बाद वर्ली-मालाबार हिल के बीच की दीवार बिना किसी विघ्न-बाधा के खड़ी हो गई। इस पर प्रोजेक्ट में शामिल लोगों ने सुकून की सांस ली। ब्रिटिश अधिकारियों को भी दैवीय शक्ति पर भरोसा करना पड़ा। इसके बाद तो इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। सन् 1831 में धाकजी दादाजी नाम के एक व्यवसायी ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और मंदिर को बड़ा स्वरूप दिया गया।

वास्तविक प्रतिमा के दर्शन –

अधिकतर मंदिर आने वाले दर्शनार्थी महालक्ष्मी की वास्तविक प्रतिमा नहीं देख पाते हैं, क्योंकि वास्तविक प्रतिमा को आवरण से ढंक दिया जाता है। यहां के पुजारी ने बताया कि असली प्रतिमा को देखने के लिए यहाँ रात को आना पड़ता है। रात के लगभग 9.30 बजे वास्तविक प्रतिमा से आवरण हटाया जाता है। तथा 10 से 15 मिनट के लिए भक्तों के दर्शन के लिए मूर्तियों को खुला ही रखा जाता है और उसके बाद मंदिर बंद हो जाता है। इसलिए यहाँ देर रात भी श्रद्धालु अच्छी संख्या में पहुंचते हैं। सुबह 6 बजे मंदिर खुलने के साथ ही माता का अभिषेक किया जाता है तथा उसके तत्काल बाद ही मूर्तियों के ऊपर फिर से आवरण चढ़ा दिए जाते है। और फिर देशभर से आए दर्शनार्थियों के दर्शनों का सिलसिला शुरू हो जाता है।

दीवार पर सिक्के चिपकाने की मान्यता –

मंदिर में एक दीवार है, जहां आपको बहुत सारे सिक्के चिपके हुए मिलेंगे। कहा जाता है कि यहाँ भक्तगण अपनी मनोकामनाओं के साथ सिक्के चिपकाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि सच्चे दिल से मांगी गई हर मनोकामनाएं यहां पूरी होती हैं। आप भी सिक्के चिपकाकर देख सकते। इस दीवार पर आसानी से सिक्के चिपक जाते हैं। मंदिर के पीछे की तरफ कुछ सीढ़ियां उतरने के बाद समुद्र का सुंदर नजारा देखा जा सकता है।

कैसे पहुंचे महालक्ष्मी मंदिर –
How To Reach MahaLaxmi Temple –

हवाई मार्ग –  महालक्ष्मी मंदिर महाराष्ट्र के मुंबई शहर में स्थित हैं। मुंबई का छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डा, एक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा हैं। जो देश के साथ साथ दुनिया के हवाई मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। महालक्ष्मी मंदिर, छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डा से लगभग 18km दूर स्थित है। यहां पहुंचने के बाद आप किसी कैब या बस की मदद से  महालक्ष्मी मंदिर पहुंच सकते हैं।

रेलमार्ग – अगर आप ट्रेन से महालक्ष्मी मंदिर जाना चाहते हैं तो बता दें कि मुंबई शहर भारत से रेलगाड़ियों द्वारा बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। मध्य, पूर्व और पश्चिम भारत से आने वाली ट्रेनें छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, या वीटी पर आती है। और उत्तर भारत से ट्रेनें मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर आती हैं।

सडक मार्ग – मुंबई के केंद्र में स्थित मुंबई सेंट्रल बस स्टेशन, शहर का मुख्य बस टर्मिनस है। जो महालक्ष्मी मंदिर से लगभग 3km दूर है। जो नासिक, सोलापुर,जालना, गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।       

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