SiddhiVinayak Temple, Mumbai | सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई

महाराष्ट्र के मुंबई शहर में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर भगवान गणेश को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसकी गिनती देश के सबसे व्यस्त धार्मिक स्थलों में की जाती है। यह मंदिर मुंबई के प्रभा देवी इलाके स्थित है। गणेश जी को हिन्दू धर्म में मंगल मूर्ति मानते है, उनकी पूजा से हमारे जीवन में जो भी बाधाये है वो निकल जाती है। सिद्धिविनायक मंदिर में गणपति बप्पा के दर्शन के लिए भारी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। जिनमे बॉलीवुड के जाने माने स्टार से लेकर नेता, बड़े उद्योगपति भी होते है। यह लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

सिद्धिविनायक मंदिर की मूल संरचना पहले काफी छोटी थी, जिसका आकार 3.6 मीटर x 3.6 मीटर वर्ग का था। प्रारंभिक संरनचा मात्र ईंटों की बनी हुई थी, जिसका गुंबद आकार का शिखर भी था। बाद में इस मंदिर का पुननिर्माण कर आकार को बढ़ाया गया।

गणपति बप्पा के सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण 19 नवंबर 1801 को एक लक्ष्मण विथु पाटिल नाम के एक स्थानीय ठेकेदार द्वारा किया गया था। बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि इस मंदिर के निर्माण में लगने वाली धनराशि एक कृषक महिला ने दी थी, कहा जाता है कि उस महिला के कोई संतान नहीं थी, उस महिला ने बप्पा के मंदिर के निर्माण के लिए मदद करने की इच्छा जताई थी। वह चाहती थी कि मंदिर में आकर भगवान के आर्शीवाद पाकर कोई महिला बांझ न रहे, सबको संतान प्राप्ति हो।

1990 में मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और मंदिर को ये वर्तमान रूप मिला। वर्तमान मंदिर पांच मंजिला है, और यहां प्रवचन ग्रह, गणेश संग्रहालय व गणेश विद्यापीठ के अलावा अस्पताल भी है, जहां रोगियों की मुफ्त चिकित्सा की जाती है। पांचवी मंजिल पर रसोईघर है, जहां से एक लिफ्ट सीधे गर्भग्रह में आती है। पुजारी गणपति के लिए निर्मित प्रसाद व लड्डू इसी रास्ते से लाते हैं।

इस मंदिर का गर्भग्रह तकरीबन 10 फीट चौड़ा और 13 फीट ऊंचा है। जिसमें तीन द्वार है जिन पर अष्टविनायक, अष्टलक्ष्मी और दशावतार की आकृतियां चित्रित हैं। गर्भग्रह में विराजते है समृद्धि के देवता श्री गणेश। यहाँ भगवान श्री गणेश की प्रतिमा चतुर्भुजी हैश्री उनके ऊपरी दाएं हाथ में कमल और बाएं हाथ में अंकुश है और नीचे के दाहिने हाथ में मोतियों की माला और बाएं हाथ में मोदक (लड्डुओं) भरा कटोरा है। गणपति के दोनों ओर उनकी दोनो पत्नियां ऋद्धि और सिद्धि मौजूद हैं जो धन, ऐश्वर्य, सफलता और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने का प्रतीक है।

गर्भग्रह में स्थापित मूर्ति काले पत्थर से बनी है। लेकिन इस पर केसरी रंग चढ़ा हुआ है। गर्भग्रह की सुन्दरता को और बढ़ाता है इसका सोने से ढका हुआ छत्र। यहाँ श्री गणेश का रूप विनायक है जिसमें उनकी सूंड दाईं और मुडी है, जानकारी के अनुसार गणेश की ऐसी प्रतिमा वाले मंदिर सिद्धपीठ कहलाते हैं, और इसलिए उन्हें सिद्धिविनायक मंदिर की संज्ञा दी जाती है। इसलिए मंदिर का नाम सिद्धिविनायक पड़ा। सिद्धिविनायक की प्रतिमा ढाई फीट ऊँची है और यह दो फीट चौड़े एक ही काले शिलाखंड से बनी है। सिद्धिविनायक में गणपति का सबसे शक्तिशाली सबसे सिद्ध रूप है महाकाल शिव की तरह इनके माथे पर तीसरी आँख है और गले में एक सर्प हार के स्थान पर लिपटा है।

मंदिर के अंदर चांदी से बनी चूहों की दो बड़ी मूर्तियां मौजूद हैं, माना जाता है कि अगर आप उनके कानों में अपनी इच्छाएं प्रकट करते हैं वे आपका संदेश भगवान गणेश तक पहुंचाते हैं। इसलिए यह धार्मिक क्रिया करते हुए आपको बहुत से श्रद्धालु मंदिर में दिख जाएंगे।

धार्मिक मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य पूरी होती है। इसी वजह से इस मंदिर में गणपति का दर्शन करने सभी धर्म और जाति के लोग आते हैं। ये मंदिर हर साल भारी दान प्राप्त करता है जिस कारण इसकी गिनती भारत के अमीर मंदिरों में भी होती है। यहाँ हर रोज़ लगभग 30 से 35 हज़ार लोग आते है मंगलवार को ये संख्या 2 लाख तक पहुँच जाती है। यहां मंगलवार के दिन होने वाली आरती काफी प्रसिद्ध है जिसमें हिस्सा लेने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंगलवार को यहां इतनी भीड़ होती है कि लाइन में चार-पांच घंटे खड़े होने के बाद दर्शन हो पाते हैं। हर साल गणपति पूजा महोत्सव यहां भाद्रपद की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक विशेष समारोह पूर्वक मनाया जाता है। इस दौरान मंदिर में भव्य आयोजन किए जाते हैं।

सिद्धिविनायक मंदिर आरती का समय –
Siddhivinayak Temple Aarti Timings –

श्री सिद्धिविनायक (shree siddhivinayak) की आरती दिन, मौसम और त्योहार के अनुसार अलग अलग समय की जाती है।

बुधवार से सोमवार आरती का समय

काकड़ आरती या सुबह की प्रार्थना – सुबह 5:30 बजे से शाम 6 बजे तक
श्री दर्शन – सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक
नैवेद्य – दोपहर 12:15 बजे से 12:30 बजे तक
श्री दर्शन – दोपहर 12:30 बजे से शाम 7:20 बजे तक
आरती या शाम की प्रार्थना अनुष्ठान – शाम 7:30 बजे से 8:00 बजे तक
श्री दर्शन – रात्रि 8:00 बजे से 9:50 बजे तक
मंदिर बंद होने से पहले शेज आरती या अंतिम आरती – सुबह 9:50 बजे

मंगलवार को आरती का समय

श्री दर्शन – सुबह 3:15 से  4:45 तक
काकड़ आरती या सुबह की प्रार्थना – सुबह 5:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक
श्री दर्शन – प्रातः 5:30 से 12:15 बजे
नैवेद्य – दोपहर 12:15 बजे से 12:30 बजे तक
श्री दर्शन – दोपहर 12:30 बजे से 8:45 बजे तक
आरती या रात की प्रार्थना -9:30 बजे से रात 10:00 बजे तक
मंदिर बंद होने से पहले शेज आरती या अंतिम आरती – 12:30 पूर्वाह्न

विनायकी चतुर्थी

काकड़ आरती या सुबह की प्रार्थना – सुबह 5:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक
श्री दर्शन – सुबह 6:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक
अभिषेक, नैवेद्य और पूजा आरती – सुबह 7:30 बजे से दोपहर एक बजे तक (इस दौरान मंदिर में भक्तों को प्रवेश की अनुमति नहीं है)
श्री दर्शन – दोपहर 1:30 से 7:20 तक
आरती या शाम की प्रार्थना – शाम 7:30 बजे से 8:00 बजे तक
श्री दर्शन – रात्रि 8:00 बजे से 9:50 तक
मंदिर बंद होने से पहले शेज आरती या अंतिम आरती – रात 9:50 बजे

संकष्टी चतुर्थी

श्री दर्शन प्रातःकालीन दर्शन- सुबह 4:00 बजे से 4:45 बजे तक
काकड़ आरती या सुबह की प्रार्थना – सुबह 5:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक
श्री दर्शन या प्रातःकालीन दर्शन – सुबह 5:30 बजे से 90 मिनट रात में चन्द्रोदय से पहले
पूजा, अभिषेक, नैवेद्य – चंद्रोदय से 90 मिनट पहले (इस दौरान मंदिर में भक्तों को अनुमति नहीं है)
रात में आरती या प्रार्थना – चंद्रोदय के बाद (अभिषेक के बाद पूजा)
मंदिर के बंद होने से पहले शेज आरती या अंतिम आरती – चंद्रोदय के 90 मिनट बाद शेजार्ट

माघी श्री गणेश जयंती

श्री दर्शन या प्रातःकालीन दर्शन – सुबह 4:00 बजे से 4:45 बजे तक
काकड़ आरती या सुबह की प्रार्थना – सुबह 5:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक
श्री दर्शन या प्रातःकालीन दर्शन – प्रातः 5:30 से प्रातः 10:45 तक
पूजा, अभिषेक, नैवेद्य और आरती – सुबह 10:45 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक
श्री दर्शन – दोपहर 1:30 से 7:20 तक
आरती या प्रार्थना – शाम 7:30 बजे से 8:00 बजे तक
श्री दर्शन या रात दर्शन: शाम 8:00 बजे से शेजारती तक
मंदिर बंद होने से पहले दिन की शेज आरती या अंतिम आरती – रथ-शोभा यात्रा के बाद शेज आरती

भाद्रपद श्री गणेश चतुर्थी

श्री दर्शन या प्रातःकालीन दर्शन – सुबह 4:00 बजे से 4:45 बजे तक
काकड़ आरती या सुबह की प्रार्थना – सुबह 5:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक
श्री दर्शन या प्रातःकालीन दर्शन – प्रातः 5:30 से प्रातः 10:45 तक
पूजा, अभिषेक, नैवेद्य और आरती – सुबह 10:45 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक
श्री दर्शन – दोपहर 1:30 से 7:20 तक
शाम को आरती या प्रार्थना – शाम 7:30 बजे से 8:00 बजे तक
श्री दर्शन या रात्रि दर्शन – रात्रि 8:00 बजे से 10:00 बजे तक
मंदिर बंद होने से पहले दिन की शेज आरती या अंतिम आरती – रात 10:00 बजे

कैसे पहुंचे सिद्धिविनायक मंदिर –
How To Reach Siddhivinayak Temple –

हवाई मार्ग –  सिद्धिविनायक मंदिर महाराष्ट्र के मुंबई शहर में स्थित हैं। मुंबई का छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डा, एक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा हैं। जो देश के साथ साथ दुनिया के हवाई मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सिद्धिविनायक मंदिर, छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डा से लगभग 12km दूर प्रभा देवी इलाके में  स्थित है। यहां पहुंचने के बाद आप किसी कैब या बस की मदद से  प्रभादेवी पहुंच सकते हैं।

रेलमार्ग अगर आप ट्रेन से सिद्धिविनायक मंदिर जाना चाहते हैं तो बता दें कि मुंबई शहर भारत से रेलगाड़ियों द्वारा बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। मध्य, पूर्व और पश्चिम भारत से आने वाली ट्रेनें छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, या वीटी पर आती है। और उत्तर भारत से ट्रेनें मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर आती हैं।

सडक मार्ग – मुंबई के केंद्र में स्थित मुंबई सेंट्रल बस स्टेशन, शहर का मुख्य बस टर्मिनस है। जो सिद्धिविनायक मंदिर से लगभग 6km दूर है। जो नासिक, सोलापुर,जालना, गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।       

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