Salasar Balaji Temple, Rajshthan | सालासर बालाजी मंदिर, राजस्थान

सालासर बालाजी मंदिर, राजस्थान के चुरू जिले में स्थित है। यह भगवान हनुमान जी को समर्पित मंदिर है। यह जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर सीकर से लगभग 57km व सूजानगढ से लगभग 24km दूर स्थित है। भारत में यह हनुमान जी का एकमात्र मंदिर है जिसमे हनुमान जी के दाढ़ी और मूँछ है। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जयंती के पावन पर्व पर यहां आने वाले सभी भक्तों की मुरादें पूरी होती है, भक्त यहां स्थित एक प्राचीन वृक्ष पर नारियल बांध कर मन्नत मांगते हैं। इस धाम के बारे में यह प्रसिद्ध है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। सालासर बालाजी सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

बालाजी मन्दिर राजस्थानी शैली में बना एक विशाल मंदिर है। मंदिर का निर्माण 1754 में शुरू हुआ था, जिसे पूरा होने में दो साल लगे। मंदिर का निर्माण मुस्लिम कारीगरों ने किया था, जिसमे मुख्य थे फतेहपुर से नूर मोहम्मद व दाऊ। पूरा मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ है। सालासर बालाजी मंदिर में इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन और दरवाजे चांदी से निर्मित हैं। अंदर मंदिर में सोने के सिंहासन पर बालाजी की विशाल प्रतिमा विराजमान है। प्रतिमा शालिग्राम पत्थर की है जिसे गेरूए रंग और सोने से सजाया गया है। उपर श्री राम जी का दरबार है तथा उनके चरणों में दाढ़ी-मूंछ से सुशोभित हनुमान जी का बालाजी रूप विराजमान है।

हर साल चैत्र पूर्णिमा तथा आश्विन पूर्णिमा के पावन पर्व पर यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सालासर बालाजी मंदिर में हनुमान जयंती, राम नवमी के अवसर पर भंडारे और कीर्तन इत्यादि का विशेष इंतजाम होता है। तथा प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार के दिन मंदिर में खूब भजन कीर्तन होते रहते हैं इस दिन भारी संख्या में लोग यहां भगवान के दर्शनों के लिए आते हैं। लगभग बीस सालों से यहां पर रामायण का अखंड पाठ होता चला आ रहा है जिसमें समस्त भक्त लोग शामिल होते हैं।

सालासर बालाजी मंदिर कथा
Salasar Balaji Temple Story

सालासर में स्थित हनुमान जी को लोग बड़े बालाजी के नाम से भी पुकारते हैं। इस मंदिर के संदर्भ में एक कथा प्रचलित है। जिसके अनुसार माना जाता है कि 1754 में श्रावण शुक्लपक्ष नवमी के दिन, राजस्थान के नागौर जिले के एक गांव असोता में अचानक खेती करते हुए एक किसान का हल किसी वस्तु से टकरा गया। और वहीं पर रुक गया जब किसान ने देखा तो उसे वहां एक शिला दिखाई दी और जब उसने वहां खुदाई आरंभ की तो वहां से मिट्टी से सनी हनुमान जी की मूर्ति प्राप्त हुई। इतने में उसकी पत्नी उसके लिए भोजन लेकर वहाँ पहुँची। किसान ने अपनी पत्नी को मूर्त्ति दिखायी। उन्होंने अपनी साड़ी (पोशाक) से मूर्त्ति साफ़ की। यह मूर्त्ति बालाजी भगवान श्री हनुमान की थी। उन्होंने समर्पण के साथ अपने सिर झुकाये और भगवान बालाजी की पूजा की। और उसने बालाजी के मूर्ति को बाजरे के चूरमे का पहला भोग लगाया। यही कारण है क‌ि बाला जी को चूरमे का भोग लगता है।

किसान ने इस घटना के बारे में लोगों को बताया। कहते हैं की वहां के जमींदार को भी उसी दिन एक सपना आया की भगवान हनुमान जी उसे आदेश देते हैं की उन्हें सालासर में स्थापित किया जाए। तो उसी रात सालासर के एक निवासी मोहनदास को भी भगवान हनुमान जी ने सपने में दर्शन देकर आदेश दिया की मुझे असोता से सालासर में लाकर स्थापित किया जाए। और ज‌िस बैलगाड़ी से मूर्त‌ि सालासर पहुंचेगी उसे सालासर पहुंचने पर कोई नहीं चलाए। जहां बैलगाड़ी खुद रुक जाए वहीं मेरी मूर्त‌ि स्‍थापि‌त कर देना।

अगले दिन भक्त मोहनदास जमींदार के पास जाकर अपने सपने के बारे में उन्हें बताते हैं तो जमींदार भी उसे उसी सपने के आदेश के बारे में बताते हैं। इस पर दोनो ही आश्चर्य चकित रह जाते हैं। तथा भगवान के आदेश अनुसार मूर्ति को सालासर में वर्तमान स्‍थान पर स्थापित कर दिया जाता है। और यह एक धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो जाता है।

इस मंदिर में बालाजी के परम भक्त मोहनदास जी की समाधि स्थित है तथा मोहनदास जी द्वारा प्रज्वलित अग्नि कुंड धूनी भी मौजूद है। मान्यता है कि इस अग्नि कुंड की विभूति समस्त दूखों एवं कष्टों को दूर कर देती है। इस मंदिर की मान्यता है कि भगवान बालाजी के दर्शन से पहले उनके परम भक्त मोहनदास जी की पूजा की जाती है।

दाढ़ी मूंछ लिए हनुमान जी की प्रतिमा –

इस मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा जो दाढ़ी मूंछ लिए हनुमान जी के व्यस्क रूप को दर्शाती है। हनुमान जी ऐसा रूप कहीं और देखने को नहीं मिलता, केवल यहीं पर आपको भगवान हनुमान जी का ऐसा रूप देखने को मिलता है। इसके पीछे मान्यता यह है क‌ि मोहनदास जी को पहली बार बालाजी ने दाढ़ी मूंछों वाले भेष के साथ दर्शन द‌िए थे। यही वजह है कि यहां हनुमानजी की मूर्ति दाढ़ी और मूछों में स्थापित है।

कैसे पहुंचे सालासर बालाजी धाम मंदिर –
How To Reach Rajasthan Salasar Balaji –

हवाई मार्ग – सालासर जाने के लिए निकटतम हवाई अड्‍डा जयपुर है, जो कि यहाँ से करीब 138km की दूरी पर स्थित है। वह से आप बस या टैक्सी की मदद से सालासर पहुंच सकते है।

रेलमार्ग –  अगर आप ट्रेन से सालासर बालाजी मंदिर जाना चाहते हैं तो बता दें कि यहां कोई रेलवे स्टेशन भी नहीं है। इसके लिए आपको तालछापर स्टेशन जाना पड़ेगा, जहां से सालासर की दूरी 26km है। जबकि सीकर से इसकी दूरी 24km है और लक्ष्मणगढ़ से ये मंदिर 30km की दूरी पर बसा हुआ है।

सडक मार्ग – अगर सालासर बालाजी मंदिर बस से जाना है तो आपको किसी भी शहर से सालासर के लिए सीधी बस मिल जाएंगी, जो सीधे आपको सालसर ही छोड़ेंगी। अगर आप अपनी गाडी से बाय रोड जा रहे हैं तो दिल्ली से जयपुर होते हुए सीकर और फिर सालासर जाना होगा।

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