बुलेट बाबा मंदिर – यहां मोटर साईकिल से मांगी जाती है मन्नत..!!

मंदिरों में भगवान की पूजा होते तो सभी ने देखी है लेकिन क्या कभी आपने मोटरसाइकिल के मंदिर के बारे में सुना है। अजीब जरूर है लेकिन सच है। राजस्थान में एक ऐसा मंदिर है, जहां रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 की पूजा होती है। यहां पूरे देश से बाइक राइडर और अन्य लोग आकर सुख समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं। इस मंदिर का नाम है ओम बन्ना धाम उर्फ बुलेट बाबा मंदिर।

ओम बन्ना धाम एक पवित्र दर्शनीय स्थल है जो राजस्थान के पाली जिले के चोटिला गांव में स्थित है। ये पाली शहर से 20km तथा जोधपुर से 53km दूर है। यहाँ लोग सफल यात्रा और मनोकामना मांगने दूर-दूर से आते हैं। ये मंदिर पूरी दुनिया का अनोखा और एक मात्र बुलेट मंदिर है। इस मंदिर में किसी देवी-देवता की नहीं बल्कि एक बुलेट बाइक की पूजा होती है। यहाँ सिर्फ आमजन ही नहीं बल्कि पुलिसवाले भी खासतौर पर इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं।

ओम बन्ना अर्थात ओम सिंह राठौड़ पाली शहर के पास ही स्थित चोटिला गांव के ठाकुर जोग सिंह राठौड़ के पुत्र थे। राजस्थान में राजपूत नवयुवकों को बन्ना कहा जाता है। लगभग 32 साल पहले 23 दिसंबर 1988 को ओम सिंह राठौड़ पाली जिले में अपनी ससुराल से अपने गाँव चोटिला आ रहे थे तभी उनका एक्सीडेंट एक पेड़ से टकराने से हो गया। ओम सिंह राठौड़ की उसी वक़्त मृत्यु हो गयी। स्थानीय निवासियों के अनुसार वह शाम का समय था। ओम बन्ना को लगा कि सड़क पर कोई है। बचने के लिए उन्होंने जैसे ही अपनी बाइक घुमाई वह सड़क पर आ रहे ट्रक से भिड़ गई और फिर सड़क पर स्थित पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि ओम बन्ना की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई।

लोगों का कहना है कि जिस जगह पर ओम बन्ना का एक्सिडेंट हुआ था, वहां अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती थीं और किसी न किसी की मृत्यु हो जाती थी। कुछ लोगों ने तो इस जगह को शापित तक करार दे दिया था। एक्सिडेंट के बाद पुलिस यहां से उनका शव और बाइक थाने ले गई। परिवार को जवान बेटे की मौत की सूचना दी गई। परिवार बेटे का शव लेकर घर पहुंचा और सभी लोग अंतिम क्रियाकर्म की तैयारी करने लगे। अगली सुबह कुछ पुलिसवाले घर पहुंचे और पूछने लगे कि क्या आप लोग थाने से बाइक भी उठा लाए हैं ? परिवार के मना करने पर इस पर बाइक की खोज की जाने लगी। तभी पुलिस को सूचना मिली की बाइक तो दुर्घटनावाली जगह पर खड़ी हुई है। पुलिसकर्मी फिर दुर्घटनास्थल पर गए तो बाइक वहीं थी। बुलेट को एक बार फिर थाने ले जाया गया लेकिन अगली सुबह बुलेट फिर थाने से गायब और उसी दुर्घटनास्थल पर पहुंच गयी। पुलिस हैरान थी, परिवार उनसे भी ज्यादा।

ऐसा तीन बार हुआ चौथी बार पुलिस ने बुलेट को थाने में चैन से बाँध कर रखा पर बुलेट सबके सामने चालू होकर पुनः अपने मालिक सवार के दुर्घटना स्थल पर पहुंच गयी इस घटना को देखने के बाद पुलिस ने परिवार वालों को बाइक वापस लौटा दी। बुलेट को घर ले आया गया लेकिन अगली ही सुबह बुलेट उसी जगह पहुंच गई जहां एक्सिडेंट हुआ था। बार-बार बाइक का घटनास्थल पहुंच जाना देखकर, ओम बन्ना के पिताजी ने इसे ओम बन्ना की इच्छा माना और बाइक को वहीं चबूतरा बनाकर खड़ा कर दिया गया। उस दिन से आज तक वहाँ दूसरी कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुयी जबकि पहले ये एरिया राजस्थान के बड़े दुर्घटना क्षेत्रों में से एक था।

लोगों का कहना है कि रात में ओम बन्ना अक्सर वाहनों को दुर्घटना से बचाने के उपाय करते और चालकों को दुर्घटना से सावधान करते दिखाई देने लगे। अनेक लोगों का मानना है कि उस दुर्घटना वाली जगह पर वे वाहन को या तो जबरदस्ती रोक देते थे या वाहन की गति धीमी कर देते थे, ताकि दुर्घटना न हो और कोई उनकी तरह असामयिक मौत का शिकार न बने। दिवंगत ओम सिंह राठौड़ की आत्मा द्वारा इस तरह का काम करते देखे जाने पर वाहन चालकों और स्थानीय लोगों में उनके प्रति श्रद्धा बढ़ती गई और इस श्रद्धा ने समय के साथ भक्ति का रूप ले लिया।

फिर यहां मंदिर का निर्माण कर दिया गया, जहां पर उनकी बुलेट मोटर साईकिल की पूजा होती है। इस रास्ते से गुजरनेवाले यात्री आते-जाते समय ओम बन्ना के मंदिर में कुशल यात्रा की प्रार्थना करके ही आगे बढ़ते हैं। इसी विश्वास के साथ कि ओम बन्ना उनकी रक्षा कर रहे हैं। और बाकायदा लोग उस मोटर साईकिल से भी मन्नत मांगते है। आज भी इस थाने में नई नियुक्ति पर आने वाला हर पुलिस कर्मी ड्यूटी ज्वाइन करने से पहले यहां मत्था टेकने जरूर आता है।

ओम बन्ना के जन्मदिन को स्थानीय लोग किसी उत्सव की तरह मनाते हैं। इस दौरान बाइक रैली और कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

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