Brahma Temple, Pushkar | ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर

हिंदू धर्म में तीन प्रधान देव माने गए हैं, ब्रह्मा, विष्णु और महेश। ब्रह्मा जी इस संसार के रचनाकार है, विष्णु पालनहार है और महेश संहारक है। लेकिन हमारे देश में जहां विष्णु और महेश यानी भोलेनाथ जी के अनेको मंदिर है। लेकिन ब्रह्मा जी का पूरे भारत में एकमात्र प्रसिद्ध मंदिर है। जो कि राजस्थान के पुष्कर में स्‍थ‍ित है। पुष्कर अजमेर शहर से 14km की दूरी पर स्थित है। यह दुनिया के टॉप 10 धार्मिक स्थानों और भारत में हिन्दुओं के टॉप 5 पवित्र स्थलों में से एक है।

पुष्कर को मंदिरों और घाटों की नगरी भी कहा जाता हैं। पुष्कर का शाब्‍दिक अर्थ है तालाब जिसका निर्माण फूलों से होता है। इस छोटे से नगर में लगभग 400 मंदिर और 52 घाट हैं, जिनका निर्माण समय-समय पर अलग-अलग राजाओं ने करवाया था।

पुष्कर को तीर्थों का मुख माना जाता है। जिस प्रकार प्रयाग को तीर्थराज कहा जाता है, उसी प्रकार से इस तीर्थ को पुष्करराज कहा जाता है। पुष्कर का मुख्य मन्दिर ब्रह्माजी का मन्दिर है। लगभग साठ सीढ़ियां चढ़ने के बाद मंदिर तक पहुंचा जाता है। मंदिर में भगवान ब्रह्मा की चतुर्मुख वाली सुंदर मूर्ति है, साथ ही भगवान ब्रह्मा की दूसरी पत्नी गायत्री (जिनके साथ भगवान ने यज्ञ किया) की भी प्रतिमा हैं। मंदिर के गर्भगृह के सामने एक चांदी का कछुआ बना हुआ है। मंदिर परिसर में भगवान इन्द्र, कुबेर की भी मूर्तियां हैं।

संगमरमर और पत्थर से बना यह ब्रह्मा मंदिर पुष्कर सरोवर के पास स्थित है, जिसका शिखर लाल रंग से रंगा हुआ है। ऐतिहासिक तौर पर यह माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ था, लेकिन पौराणिक मान्यता के अनुसार यह मंदिर लगभग 2000 वर्ष प्राचीन है। हालांकि पौराणिक मान्यता अनुसार पुष्कर नगर लगभग 7 हजार वर्ष पुराना है। इस मंदिर का निर्माण ऋषि विश्वामित्र के द्वारा शरू किया गया था बाद में शंकराचार्य ने इसका जीर्णोद्धार किया था।

पुष्कर सरोवर को कैलाश मानसरोवर के समान पवित्र माना जाता है। यहां तीन सरोवर हैं, जो ज्येष्ठ, मध्यम और लघु पुष्कर के नाम से प्रसिद्ध हैं। ज्येष्ठ के देवता ब्रम्हा, मध्यम के देवता विष्णु और लघु (कनिष्क) पुष्कर के देवता महेश हैं। ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करने और पुष्कर झील में डुबकी लगाने से भक्तों को अदभुद शांति की प्राप्ति होती है।

ब्रह्मा, सावित्री ओर गायत्री के मंदिर के अतिरिक्त यहां बदरीनारायण, वाराह और शिव आत्मेश्वर के मंदिर है। यहां के प्राचीन मंदिरों को मुगल सम्राट औंरगजेब ने नष्ट-भ्रष्ट कर दिया था। पुष्कर झील के तट पर जगह-जगह पक्के घाट बने हैं, जो राजपूताना के देशी राज्यों के धनीमानी व्यक्तियों द्वारा बनाए गए हैं। पुष्कर का उल्लेख रामायण में भी हुआ है। सर्ग 62 श्लोक 28 में विश्वामित्र के यहां तप करने की बात कही गई है। सर्ग 63 श्लोक 15 के अनुसार मेनका यहां के पावन जल में स्नान के लिए आई थीं।

पुष्कर की पौराणिक कथा –

हिन्दू धर्मग्रंथ पद्म पुराण के अनुसार एक समय धरती पर वज्रनाश नामक राक्षस ने उत्पात मचा रखा था। उसके बढ़ते अत्याचारों से तंग आकर ब्रह्मा जी ने उसका वध किया। लेकिन वध करते वक़्त उनके हाथों से तीन जगहों पर कमल का पुष्प गिरा, इन तीनों जगहों पर तीन झीलें बनी। इसी घटना के बाद इस स्थान का नाम पुष्कर पड़ा। इस घटना के बाद ब्रह्मा ने संसार की भलाई के लिए यहां एक यज्ञ करने का फैसला किया। ब्रह्मा जी यज्ञ करने के लिए पुष्कर पहुंचे लेकिन किसी कारण वश सावित्री जी वहां समय पर नहीं पहुंच पाई। यज्ञ को पूर्ण करने के लिए उनके साथ उनकी पत्नी का होना जरूरी था, लेकिन सावित्री जी के नहीं पहुंचने की वजह से उन्होंने ग्वाल बाला गायत्री से विवाह कर यज्ञ शुरू कर दिया लेकिन जब सावित्री वहां पहुंची और ब्रह्मा जी के बगल में दूसरी कन्या को देखा तो वे क्रोधित हो गईं और उन्होंने क्रोध में आकर ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया।

सावित्री जी ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया की देवता होने के बावजूद उनकी पूजा कभी नहीं की जाएगी। भगवान विष्णु ने भी इस काम में ब्रह्मा जी की मदद की थी। इसलिए देवी सावित्री जी ने विष्णु जी को भी श्राप दिया था कि उन्हें पत्नी से विरह का कष्ट सहन करना पड़ेगा। इसी कारण भगवान विष्णु के मानव अवतार श्री राम को 14 साल के वनवास के दौरान अपनी पत्नी से अलग रहना पड़ा था। सावित्री जी को क्रोधित देख सभी देवताओं ने उनसे श्राप वापस लेने की विनती की लेकिन दिया हुआ श्राप दोबारा लिया नहीं जाता। इसलिए सावित्री जी ने कहा कि इस धरती पर सिर्फ पुष्कर में आपकी पूजा होगी। कोई भी दूसरा आपका मंदिर बनाएगा तो उसका विनाश हो जाएगा। तभी से पूरे भारत में ब्रह्मा जी का पुष्कर के अलावा कोई मंदिर नहीं है।

एक दूसरी कथा के अनुसार भगवान शंकर ने एक स्तंभ खड़ा किया जिसके आदि और अंत को ढूंढने का जब प्रश्न खड़ा हुआ तो भगवान विष्णु उसके नीचे गए और ब्रह्मा ऊपर गए। जब विष्णु लौटे तो उन्होंने मार्ग में उन्होंने जो जो देखा उसे सच सच कहा और अंत में कहा कि इसका कोई प्रारंभ नजर नहीं आता। इस तरह जब शिवजी ने ब्रह्मा से पूछा तो उन्होंने झूठ कह दिया कि हां मैंने इसका अंत देखा है। इस झूठ के कारण ही उनको शाप मिला की दुनिया में कहीं भी आपकी पूजा नहीं होगी।

सावित्री मंदिर (Savitri Temple) – पुष्कर में जितनी अहमियत ब्रह्मा जी की है, उतनी ही देवी सावित्री की भी है। पुष्कर में सावित्री जी का मंदिर, ब्रह्मा जी मंदिर के पास न होकर ब्रह्मा जी के मंदिर के पीछे एक पहाड़ी पर स्थित है जहां तक पहुंचने के लिए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। सावित्री जी को सौभाग्य की देवी माना जाता है। यह मान्यता है कि यहां पूजा करने से सुहाग की लंबी उम्र होती है। यही वजह है कि महिलाएं यहां आकर प्रसाद के तौर पर मेहंदी, बिंदी और चूड़ियां चढ़ाती हैं और सावित्री जी से पति की लंबी उम्र मांगती हैं।

पुष्कर मेला –

ब्रह्माजी ने पुष्कर झील किनारे कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णमासी तक यज्ञ किया था, जिसकी स्मृति में अनादि काल से यहां कार्तिक मेला लगता आ रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक भी आते हैं। हजारों हिंदू लोग इस मेले में आते हैं। औरअपने को पवित्र करने के लिए पुष्कर झील में स्नान करते हैं। भक्तगण एवं पर्यटक श्री ब्रह्मा जी एवं अन्य मंदिरों के दर्शन कर आत्मिक लाभ प्राप्त करते हैं। राज्य प्रशासन भी इस मेले को विशेष महत्व देता है। स्थानीय प्रशासन इस मेले की व्यवस्था करता है एवं कला संस्कृति तथा पर्यटन विभाग इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। पांच दिवसीय लंबे इस मेले के दौरान भक्त पवित्र पुष्कर सरोवर में डुबकी लगाते हैं और ब्रह्मा मंदिर में कई विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर समय सारणी –
Brahma Temple Pushkar Time Table  –

  • सर्दियों के दौरान मंदिर खुलने का समय- सुबह 6:30 से रात 8:30 बजे
  • गर्मियों के दौरान मंदिर खुलने का समय- सुबह 6:00 से रात 9:00 बजे तक
  • दोपहर 1:30 से 3:00 बजे के बीच मंदिर बंद कर दिया जाता है।

ब्रह्माजी मंदिर पुष्कर जाने का सबसे अच्छा समय –
Best Time To Visit Brahma Mandir Pushkar–

ब्रह्मा मंदिर की यात्रा करने का आदर्श समय सर्दियों के मौसम में यानि अक्टूबर से मार्च के बीच होता है। इस दौरान राजस्थान का तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, जो ज्यादा ठंडा नहीं है। गर्मियों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। सर्दियों के दौरान आप कार्तिक पूर्णिमा पर नवंबर में आयोजित होने वाले पुष्कर मेले में शामिल हो सकते हैं।

ब्रह्माजी मंदिर पुष्कर के प्रमुख पर्यटन स्थल

  • पुष्कर झील (Pushkar Lake)
  • वराह मंदिर (Varaha Temple)
  • पाप मोचनी मंदिर (Pap Mochani Mandir)
  • नाग पहाड़ (Naga Pahar Hill)
  • आत्मेश्वर मंदिर (Atmeshwar Mandir)
  • रोज गार्डन (Rose Garden)
  • मोती महल (Moti Mahal)
  • रंगजी मंदिर (Rangji Temple)
  • सिंह सभा गुरुद्वारा (Singh Sabha Gurudwara)
  •  दिगंबर जैन मंदिर (Digambar Jain Mandir)

ब्रह्माजी मंदिर पुष्कर राजस्थान कैसे जाये –
How To Reach Brahma Temple Pushkar –

हवाई मार्ग (By Air) – पुष्कर का सबसे निकट का एयरपोर्ट जयपुर है, जो पुष्कर से 150km की दूरी पर है। जयपुर पहुँचने के बाद कैब के द्वारा पुष्कर पहुँचा जा सकता है और ब्रह्मा मंदिर का दर्शन किया जा सकता है।

रेल मार्ग (By Rail) – पुष्कर का निकटतम रेल्वे स्टेशन अजमेर है। जहाँ से बस और कैब की सुविधा प्राप्त कर पुष्कर पहुँचा जा सकता है।

सड़क मार्ग ( By Road) यदि आपने बस के माध्यम से राजस्थान के पर्यटक स्थल पुष्कर जाने का बिचार बना लिया हैं, तो हम आपको बता दें कि अजमेर का बस स्टैंड देश के प्रमुख शहरों से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ हैं। अजमेर से पुष्कर की दूरी लगभग 16km हैं ,आप यहां से आसानी से पुष्कर पहुंच जायेंगे।

Leave a Reply