Ramnagar Fort, Varanasi | रामनगर किला, वाराणसी

रामनगर का किला वाराणसी के रामनगर में गंगा नदी के पूर्वी तट पर तुलसी घाट के सामने स्थित है। यह किला मक्खन के रंग वाले मिर्जापुर के चुनार के बालूपत्थर ने बना है। यह वाराणसी से 14km और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से 2km की दूरी पर स्थित है। गंगा नदी के किनारे बने इस किले का निर्माण सन 1750 में काशी नरेश बलवंत ने करवाया था। ये किला हमेशा से ही काशी के राजाओं का निवास स्थान रहा है, वर्तमान में भी काशी नरेश अनंत नारायण सिंह यहाँ रहते है। किले के जिस भाग में वर्तमान काशी नरेश रहते है वहाँ आम लोगों के जाने पर पाबंदी है।

रामनगर के किले में मुगलकाल की वास्तुकला का अद्भुत दृश्य मिलता है। किले में चार द्वार है जिसमें पूर्वी दिशा में बना लाल दरवाजा दुर्ग का मुख्य द्वार है, मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर के भवनों के बीच एक बड़ा खुला मैदान है। किले का पश्चिमी द्वार, जो गंगा की तरफ खुलता है उस द्वार पर बाढ़ के समय गंगा के तल को मापने का एक मानक चिन्ह बना हुआ है। जिससे महाराज किले में रहते हुए गंगा में आई बाढ़ और उससे काशी में रहने वाले लोगो के उप्पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर सके।

इस किले का एक हिस्सा, जो दरबार हॉल हुआ करता था, संग्रहालय में तब्दील हो गया है, जिसे सरस्वती भवन के नाम से जाना जाता हैं। इस संग्रहालय में राज परिवार से संबंधित वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। यह संग्रहालय प्राचीन पांडुलिपियों व ग्रंथों, पुराने फर्नीचर, विंटेज कारों, शाही पोशाकों, ज़री वस्त्र से सुसज्जित पालकियों, हाथी पर बैठने की चांदी से बनी काठियां के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर एक शस्त्रागार भी है जिसमें बर्मा (म्यांमार), जापान तथा कुछ अफ्रीकी देशों से लाई गई तलवारें एवं पुरानी बंदूकें हैं तथा खगोलीय घड़ी भी है। इस घड़ी से माह, सप्ताह, दिन, समय एवं अन्य खगोलीय विवरण जैसे गृहों, चंद्रमा तथा सूर्य की स्थिति का पता चलता है। इस घडी को लोग पंचांग घडी या ज्योतिष घडी के नाम से भी पुकारते है।

रामनगर का किला दस दिनों तक चलने वाले रामलीला के लिए देश दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां का रावण दहन देखने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं। रामनगर किले में राज मंगल नामक एक प्रसिद्ध त्योहार भी फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है। किले के अंदर छिन्नमस्तिका मंदिर (Chhinnamastika Temple), दुर्गा मंदिर और दक्षिण मुखी हनुमान का मंदिर है।

इस किले का ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व भी है। इसे महाभारत काल से जोड़ा जाता है ऐसा कहा जाता है कि महर्षि वेद व्यास जी यहां पर रहा करते थे तथा उन्होंने रामनगर में ही तपस्या की थी। इसलिए उनके सम्मान में यह किला बनवाया गया था। यही कारण हैं जो रामनगर को व्यास काशी भी कहते हैं। किले के अंदर महर्षि वेद व्यास जी को समर्पित एक  मंदिर भी है।

वाराणसी के दर्शनीय स्थल –

वाराणसी के अन्य दर्शनीय स्थल –

  • लोलार्क कुंड
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय
  • जैन मंदिर
  • गोडोवालिया मार्केट
  • जंतर-मंतर
  • भारत माता मंदिर
  • संकट मोचन मंदिर
  • ललिता गौरी मंदिर
  • कालभैरव मंदिर
  • डंडी राज गणेश मंदिर

वाराणसी जाने का अच्छा समय –
Best Time To Visit Varanasi –

अगर आप वाराणसी सिर्फ काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन करने के लिए जाना चाहते हैं तो आप साल के किसी भी महीने में जा सकते हैं। लेकिन यदि आप काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा वाराणसी के अन्य पर्यटन स्थल देखना चाहते हैं तो वाराणसी जाने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी के बीच होता है। बरसात के समय में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाट और सीढ़ियां डूब जाती हैं जिसके कारण आप वहां का मनमोहक दृश्य नहीं देख पाएंगे। इसके अलावा वाराणसी में मार्च से लेकर सितंबर माह तक गर्मी और उमस भी खूब होती है। इसलिए वाराणसी जाने का उत्तम समय नवंबर से फरवरी के बीच है। नवंबर में हर साल वाराणसी में एक पांच दिवसीय उत्सव गंगा महोत्सव मनाया जाता है, यह उत्सव आने वाले पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है।

वाराणसी कैसे पहुंचें –
How to reach Varanasi –

हवाई मार्ग- लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट वाराणसी का मुख्य एयरपोर्ट है जो विश्वनाथ मंदिर से 25km दूर बाबतपुर में स्थित है।

रेलवे मार्ग – वाराणसी सिटी स्टेशन विश्वनाथ मंदिर से केवल 2km दूर है, जबकि वाराणसी जंक्शन लगभग 6km  दूर है। मंडुआडीह स्टेशन से विश्वनाथ मंदिर 4km है। वाराणसी के ये सभी स्टेशन भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशन से जुड़े हुए हैं, जहां आप ट्रेन से पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग – वाराणसी (राष्ट्रीय राजमार्ग) NH 2 को कलकत्ता से दिल्ली तक, NH 7 से कन्या कुमारी और NH 29 गोरखपुर के साथ जुड़ा हुआ है, जो पूरे देश में सभी प्रमुख सड़कों से जुड़ा हुआ है।

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