Mahabaleshwar – A Famous hill Station | महाबलेश्वर – एक प्रसिद्ध हिल स्‍टेशन

महाबलेश्वर महाराष्ट्र का बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है जो महाराष्ट्र राज्य में सतारा जिले से 68 किमी दूर स्थित है। यह मुम्‍बई से 260km और पुणे से 122km की दुरी पर स्थित है। अपनी प्राकतिक खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है महाबलेश्वर, सतारा नगर के पश्चिमोत्तर में पश्चिमी घाट की सह्याद्रि पहाड़ियों में  समुन्द्र तट से लगभग 1353 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसे महाराष्ट्र के हिल स्टेशनों की रानी कहा जाता है।

यहां दूर-दूर तक फैली पहाड़ियां और उन पर छिटकी हरियाली बेहद खूबसूरत और सुकून देने वाला नजारा पेश करती है। महाबलेश्वर अपनी मनोरम सुंदरता, नदियों, शानदार झरनों, राजसी चोटियों और खूबसूरत स्ट्रॉबेरी फार्म के लिए जाना जाता है। इस शहर में प्राचीन मंदिर, बोर्डिंग स्कूल, हरे-भरे घने जंगल, झरने, पहाड़ियां, घाटियां शामिल हैं। पर्यटकों के लिए महाबलेश्वर में छुट्टियां बिताना बेहद मजेदार और रोमांचक अनुभव होता है।

महाबलेश्वर को पांच नदियों की भूमि भी कहते हैं। दरअसल यहां पर वीना, गायत्री, सावित्री, कोयना और कृष्‍णा नाम की 5 नदियां बहती है। यह सह्याद्रि पर्वत से निकलने वाली कृष्णा नदी का उद्गम स्थल भी है जो महाराष्ट्र के अलावा आंध्रप्रदेश से होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। महाबलेश्‍वर का शाब्दिक अर्थ होता है- गॉड ऑफ ग्रेट पॉवर यानि कि भगवान की महान शक्ति

महाबलेश्वर का इतिहास – 

महाबलेश्वर का पहला ऐतिहासिक उल्लेख वर्ष 1215 से मिलता है जब देवगिरि के राजा सिंघान ने महाबलेश्वर का दौरा किया था। उन्होंने कृष्णा नदी के स्रोत पर एक मंदिर और पानी के कुण्ड का निर्माण किया। 1350 के आसपास, ब्राह्मण वंश ने इस क्षेत्र पर शासन किया। 16 वीं शताब्दी के मध्य में चंदाराव के मराठा परिवार ने ब्राह्मण वंश को हराया और जावली और महाबलेश्वर के शासक बने, इस अवधि के दौरान पुराने महाबलेश्वर मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। 1656 में, मराठा साम्राज्य के संस्थापक, शिवाजी राजे ने इस क्षेत्र पर कब्‍जा कर यहां पर मशहूर प्रतापगढ़ किला बनवाया था।  यह किला आज तक शिवाजी के वंशजों के हाथों में है  साल 1819 में अंग्रेजों ने महाबलेश्वर को अपने हाथों में ले लियाब्रिटिश काल में यह बॉम्बे प्रेसिडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करता था। ब्रिटिश काल में यह बॉम्बे प्रेसिडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करता था। आजादी के बाद महाबलेश्वर एक हिल स्‍टेशन के रूप में उभरा था।

यहां के मैप्रो गार्डन में आयोजित होने वाला दो दिवसीय स्ट्रॉबेरी फेस्टिवल दुनियाभर में बेहद मशहूर है, जिसका आनंद उठाने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पंचगनी पहुंचते हैं। इस फेस्टिवल की खासियत यह है कि इस दौरान सैलानी न सिर्फ स्ट्रॉबेरी का कई स्वादों में आनंद उठाते हैं बल्कि उन्हें स्ट्रॉबेरी को पेड़ से तोड़कर खाने का मौका भी मिलता है। फेस्टिवल के मौके पर पूरे पंचगनी में मेले-सा माहौल रहता है। स्ट्रॉबेरी फेस्टिवल के दौरान यहां कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें पंचगनी और आस-पास के इलाकों से आए स्थानीय कलाकार लोक नृत्य, संगीत और मनोरंजन के कई कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।

महाबलेश्वर में घूमने के लिए अन्य स्थान –
Other places to visit in Mahabaleshwar –

एलीफेंट हेड पॉइंट (Elephants Head Point) – एलीफेंट हेड पॉइंट समुन्द्र तल से लगभग 4067 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। ये हाथी के सर की तरह दिखाई पड़ता है। इसके करिश्माई रूप को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रहती है। यहां का खुशनुमा वातावरण आपके दिल को जीत लेगा। यहां पर एक पहाड़ी है जो कि हाथी के सिर की तरह दिखता है। इसलिए इसे ऐलिफेंट हेड के नाम से भी जाना जाता है।

महाबलेश्वर मंदिर (Mahabaleshwar Temple) – महाबलेश्वर शहर से 6 किमी की दूरी पर स्थित महाबलेश्वर मंदिर एक प्राचीन मंदिर है और मराठा विरासत का एक आदर्श उदाहरण है। महाबली के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर हिंदुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि भगवान शिव यहां के प्रमुख देवता हैं। पहाड़ी इलाकों के बीच स्थापित, यह सुरम्य मंदिर 16 वीं शताब्दी के दौरान मराठा साम्राज्य और उसके शासन का महिमामंडन करता है।  इस मंदिर का मुख्य आकर्षण 6 फीट लंबा शिव लिंग है, जिसमें भगवान शिव के पत्थर के अवतार को दर्शाया गया है। महाबलेश्वर मंदिर में बहुत ही शांत और आध्यात्मिक वातावरण है। भगवान शिव की शांत और शांत आभा देखने के लिए भक्त साल भर मंदिर आते हैं। इस स्थल के पास दो और मंदिर हैं, जिनका नाम है अतीबलेश्वर मंदिर और पंचगंगा मंदिर।

वेन्ना झील (Venna lake) – वेन्ना झील महाबलेश्वर में एक सुंदर और दर्शनीय झील है। महाबलेश्वर के सबसे प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षणों में से एक यह झील ऊंचे पेड़ों और घास से ढकी हुई है। वेन्ना झील मानव निर्मित झील है और यह प्राकृतिक नहीं है। वेन्ना झील का निर्माण 1942 में श्री अप्पासाहेब महाराज द्वारा किया गया था, जो सतारा के शासक थे और छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज थे। झील का निर्माण महाबलेश्वर शहर की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया था। झील में पर्यटकों के लिए नाव की सवारी भी उपलब्ध है। पर्यटक आस-पास की जगहों को देखने के लिए घोड़े की सवारी का विकल्प भी चुन सकते हैं।

प्रतापगढ़ किला (Patapgarh Fort) महाबलेश्वर के पास एक और जगह देखने योग्य है प्रतापगढ़ किला, जो यहां से 24km दूर है। यह किला 1100 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। यह किला भारतीय इतिहास के उस दौर का भी गवाह है जब शिवाजी ने एक ताकतवर योद्धा अफजल खान को नाटकीय तरीके से मार दिया था और जहां से मराठा साम्राज्य ने एक निर्णायक मोड़ लिया। पानघाट पर स्थित यह किला छत्रपति शिवाजी के आठ प्रमुख किलों में से एक माना जाता है। यह किला मराठा सम्राट शिवाजी के उन किलों में से एक हैं जिन्हें शिवाजी ने अपने निवास स्थान के तौर पर तैयार करवाया था। इस स्थान पर अफजल खां की कब्र भी है। 

लिंगमला फॉल्स (Lingmala Waterfall) – लिंगमला  फॉल्स प्राकृतिक सुंदरता एक खूबसूरत उदाहरण है। महाबलेश्वर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, लिंगमाला झरना महाबलेश्वर-पुणे मार्ग के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। लिंगमाला का वन बंगला गिर के पास स्थित है। यहां का पानी लगभग 600 फीट की ऊंचाई से  नीचे गिरता है

पंचगनी (Panchgani) – कृष्णा घाटी में दक्षिण में स्थित पंचगनी महाबलेश्वर से मात्र 19 कि.मी. दूर है। यह चारों ओर से रमणीक दृश्यों से भरपूर होने के कारण सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहाँ टेबल टॉप या टेबल लैंड है, जहाँ अनगिनत फिल्मों के प्रेमगीतों की शूटिंग होती रहती है। यहाँ पर्वत श्रृंखला को देखना और तेज हवाओं से बात करना एक अनूठा अनुभव है।

बॉम्बे पॉइंट (Bombay Point) – बॉम्बे पॉइंट पर अगर आप जाते हैं तो यहां से आपको सनसेट का खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा। यह आकर आपको ऐसा लगेगा, जैसा सूरज की लाली आसमान में बिखर गई हो।

तपोला (Tapola) – महाबलेश्वर से 28 किमी दूर स्थित तपोला महाराष्ट्र का एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।अपनी बेशकीमती प्राकृतिक सौंदर्यता के कारण तपोला को पश्चिम का मिनी कश्मीर कहा जाता है। यह प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थल है, इस स्थान पर घने वन क्षेत्र में कई किले हैं, इन किलों का दृश्य काफी मनोरम है। तपोला झील के पास कुछ फासले पर घुमाने लायक कई दर्शनीय स्थल मौजूद हैं। इस जगह का सबसे बड़ा पर्यटक आकर्षण ट्रेकिंग है जो यात्रियों को बहुत उत्साहित करता है। यहां आने वाले पर्यटक नाव की सैर का भी आनंद लेते हैं, जिसके दौरान त्रिवेणी संगम, बामनोली द्वीप जैसे खूबसूरत स्थान और बहुत कुछ देखा जा सकता है।

महाबलेश्वर के आसपास के स्थान
Places to Visit Near Mahabaleshar

महाबलेश्वर जाने का सबसे अच्छा समय  –
Best Time To Visit Mahabaleshwar

महाबलेश्वर का मौसम पूरे साल सुखद और बेहद सुहाना रहता है, इसलिए सालभर में आप कभी भी महाबलेश्वर की यात्रा कर सकते हैं। चूँकि यह समुद्र तल से 1353 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, इस ऊंचाई पर मौसम रुक-रुक कर वर्षा के साथ पूरे साल सुखद रहता है। इसलिए, यदि आप एक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो महाबलेश्वर जाने के लिए अक्टूबर-जून के बीच का महीना काफी अच्छा होता है। बरसात के मौसम में यहां हर साल औसत से भारी वर्षा होती है। पहाड़ बारिश में बहुत खूबसूरत लगते हैं, लेकिन यह बहुत से पर्यटकों के लिए लोकप्रिय नहीं है क्योंकि मौसम की वजह से बाहरी गतिविधियां इस समय बंद होती है

महाबलेश्वर तक कैसे पहुंचे –
How To Reach Mahabaleshwar –

हवाई मार्ग – महाबलेश्वर का निकटतम हवाई अड्डा पुणे (PUNE) 120 km, मुंबई (Mumbai) 260 km है। वहाँ से आप महाबलेश्वर के लिए आप टैक्सी किराए पर लेकर महाबलेश्वर पहुंच सकते हैं।

रेलमार्ग – महाबलेश्वर के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन वाथर(Wathar) में स्थित है जो महाबलेश्वर से 60 km की दूरी पर है। पुणे (Pune) रेलवे स्टेशन महाबलेश्वर की यात्रा के लिए एक सुविधाजनक मार्ग है। चूंकि, पुणे रेल द्वारा दूसरे शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। पुणे (Pune) रेलवे स्टेशन से महाबलेश्वर की दुरी 122km है।

सडक मार्ग – महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) मुंबई, पुणे, नासिक, पंचगनी, सतारा और कोल्हापुर जैसे नजदीकी शहरों से महाबलेश्वर के लिए नियमित बस सेवाएं प्रदान करता है। इस खूबसूरत हिल स्टेशन तक पहुँचने के लिए मुंबई और पुणे से टैक्सी भी ले सकते हैं। मुंबई से ड्राइविंग करने वाले लोग महाबलेश्वर तक पहुंचने के लिए मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और NH 4 मार्ग से जा सकते हैं।

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