Shaniwar wada, Pune | शनिवार वाडा, पुणे

भारत की एतिहासिक धरोहर शनिवार वाडा किला (Shaniwar Wada Fort) पुणे, महाराष्ट्र का एक प्रमुख पर्यटक स्थल है। शनिवार वाड़ा का निर्माण, मराठा साम्राज्य में पेशवा बाजीराव प्रथम, जो कि छत्रपति शाहु के प्रधान (पेशवा) थे, ने करवाया था। शनिवार वाड़ा का मराठी में मतलब शनिवार (शनिवार/Saturday) तथा वाड़ा का मतलब रहने का स्थान होता है। शनिवार वाडा की नींव 10 जनवारी 1730 में शनिवार (Julian calendar के अनुसार) के दिन रखी गई थी। 22 जनवरी 1732 को शनिवार के दिन ही किले का उद्घाटन संपन्न हुआ। शनिवार के दिन नींव रखे जाने के कारण इस किले का नाम ‘शनिवार वाडा’ (Shaniwar Wada) पड़ा।

इस 7 मंजिला किले के निर्माण की जिम्मेदारी राजस्थान के ठेकेदारों को सौंपी गई, जो ‘कुमावत क्षत्रिय’ (Kumawat Kshatriya) कहलाते थे। इसे पूर्णतः पत्थरों से निर्मित किये जाने की योजना थी। किंतु सतारा की प्रजा द्वारा वहाँ के राजा साहू से शिकायत की गई कि पत्थरों से ईमारत के निर्माण का अधिकार केवल राजाओं का है।जिसके बाद राजा साहू द्वारा पेशवाओं को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई गई और शनिवार वाडे का निर्माण पत्थरों के बजाय ईंट से करने को कहा। उस समय तक किले का आधार तैयार हो चुका था। राजा साहू की बात मानकर पेशवाओं ने किले की शेष मंजिलों का निर्माण ईंटों से करवाया। शनिवार वाडा किले में प्रवेश हेतु ५ दरवाजे बने हुए हैं, जिन्हें विभिन्न नाम दिए गए है —

  • दिल्ली दरवाज़ा  – यह किले का मुख्य द्वार है. यह उत्तर दिशा में दिल्ली की ओर खुलता है. इस कारण इसे ‘दिल्ली दरवाज़ा’ भी कहा जाता है।
  • मस्तानी दरवाज़ा या अलीबहादुर दरवाज़ा  – यह दरवाज़ा उत्तर दिशा में खुलता है. पेशवा बाजीराव की दूसरी पत्नि मस्तानी बाहर जाते समय इसी दरवाज़े का इस्तेमाल करती थी। इस कारण इस दरवाज़े का नाम ‘मस्तानी दरवाज़ा’ पड़ा. इसे ‘अलीबहादुर दरवाज़ा’ का नाम भी दिया गया है।
  • खिड़की दरवाज़ा  – यह दरवाज़ा पूर्व दिशा में खुलता है. खिड़की बनी होने के कारण इसका नाम ‘खिड़की दरवाज़ा’ पड़ा।
  • गणेश दरवाज़ा  – यह दरवाज़ा दक्षिण-पूर्व दिशा में खुलता है. किले परिसर में बने गणेश महल के नज़दीक होने के कारण इसका नाम ‘गणेश दरवाज़ा’ पड़ा। इस दरवाज़े का उपयोग महिलायें ‘क़स्बा गणपति मंदिर’ (Kasba Ganpati Temple) में दर्शन के लिए आते समय करती थी।
  • जम्भूल दरवाज़ा या नारायण दरवाज़ा  – जम्भूल दरवाज़ा दक्षिण दिशा में खुलता है। इसका उपयोग दासियाँ किले में आने-जाने के लिए किया करती थी। इस दरवाज़े का दूसरा नाम ‘नारायणराव दरवाज़ा’ नारायण राव की मृत्यु के उपरांत दिया गया। इसी दरवाज़े से उनका शव किले के बाहर ले जाया गया था।

इस किले में 30 अगस्त 1773 की रात को 16 साल के नारायण राव ( 5 वें पेशवा) जो कि मात्र 14 साल में मराठा साम्राज्य के पेशवा बने थे, उनकी षड़यंत्र करके हत्या कर दी गई थी। जब हत्यारे उनकी हत्या के लिए किले में घुसे नारायण राव खतरा भांपते हुए अपने कक्ष से, अपने काका (रघुनाथ राव 6 वें पेशवा)  के कक्ष की ओर ये कहते हुए भागा – ‘काका माला वाचवा’ अर्थात् ‘चाचा मुझे बचाओ’. किंतु उसके अपने काका तक पहुँचने के पहले ही गार्दियों ने उसे पकड़कर मौत के घाट उतार लिया। इतिहासकार मानते हैं कि उनके चाचा ने ही उनकी हत्या करवाई थी। कहते है की किले में उसी बच्चे नारायण राव की आत्मा आज भी भटकती है और उसके द्वारा बोले गए आखिरी शब्द “काका माला वचाव” आज भी किले में सुनाई देते है। इसलिए इस किले को इंडिया के टॉप मोस्ट हॉन्टेड प्लेस  (Top most haunted place of India) में शामिल किया जाता है।

1818 ईसवी तक इस विशाल किले पर मराठा के पेशवाओं का अधिकार रहा। इस दौरान बाजीराव द्दितीय ने अपने पद से इस्तीफा देकर इस दुर्ग को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सर जॉन मल्कोल्म के हवाले कर दिया था और वे उत्तरप्रदेश के कानपुर चले गए और इस तरह पेशवाओ की शान रहे इस किले पर अंग्रेजो का अधिकार हो गया।।

इसके करीब 10 साल बाद 1828 ईसवी में इस किले में भीषण आग लग गई और इस किले का एक बड़ा हिस्सा भयंकर आग की चपेट में आकर नष्ट हो गया था। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि इसे बुझाने में करीब 7 दिन का लंबा वक्त लग गया था। शनिवार वाड़ा में लगी आग के कारणों का कभी खुलासा नहीं हो सका। यह अभी तक एक रहस्य बना हुआ है। वहीं आग के बाद इस भव्य किले के अब कुछ अवशेष ही बाकी बचे हैं।

शनिवार वाड़े में बना लोटस फाउंटेन यहां आने वाले पर्यटकों के आर्कषण का मुख्य केन्द्र है। यह कमल के फूल के आकार में बनी बेहद खूबसूरत आकृति है, जो कि अपनी बेजोड़ कलात्मकता के लिए कफी प्रख्यात भी है। प्राचीन समय में इसका इस्तेमाल नृतक आदि के लिए किया जाता था। वहीं इस आर्कषित फाउंटेन के पास स्थित फूलों का सुंदर बगीचा इसकी शोभा और भी अधिक बढ़ाता है।

पुणे में घूमने की सबसे खास जगह –
Best Places To Visit In Pune –

पुणे में घूमने के प्रसिद्ध उद्यान –
Famous Garden To Visit In Pune –

  • बंड गार्डन – Bund Garden
  • सरस बाग – Saras Baug
  • कमला नेहरू पार्क – Kamala Nehru Park
  • पुणे-ओकायामा फ्रेंडशिप गार्डनPune Okayama Friendship Garden
  • शुन्यो पार्क – Shunyo Park
  • इम्प्रेस गार्डन – Empress Garden
  • तथवाडे पार्क – Tathawade Park
  • पेशवे पार्क – Peshwa Udyan
  • कात्रज स्नेक पार्क  – Katraj Snake Park
  • बनर पशन जैव विविधता पार्क – Baner Pashan Biodiversity Park
  • संभाजी उद्यान – Sambhaji Park
  • चित्तरंजन वाटिका – Chittaranjan Vatika garden
  • राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान – Rajiv Gandhi National Park
  • ग्राम संस्कृति उद्यान – Gram sanskruti udyan
  • बटरफ्लाय पार्क – Butterfly Park

पुणे के आसपास के स्थान
Places to Visit Near Pune

पुणे जाने के लिए सबसे अच्छा समय
Best Time To Visit Pune

पुणे की यात्रा का सबसे अच्छा समय मानसून और सर्दी दोनों हैं। जुलाई से फरवरी तक पुणे के मौसम काफी अच्छा रहता है, इसलिए यह महाराष्ट्र के इस विशाल शहर की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय है। दिसंबर के महीने में पुणे में सवाई गंधर्व संगीत महोत्सव का आयोजन होता है जो पूरे भारतीय शास्त्रीय संगीत प्रेमियों को आकर्षित करता है। गर्मियों के मौसम में पुणे का तपमान ज्यादा होता है, इसलिए गर्मियों में यहां जाने से बचना ही बेहतर रहेगा।

पुणे तक कैसे पहुंचे –
How To Reach Pune –

हवाई मार्ग – पुणे एयरपोर्ट, पुणे शहर के केंद्र में स्थित है, जो कि एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। पुणे के लिए आपको सभी बड़े प्रमुख हवाई अड्डों से फ्लाइट आसानी से मिल जाएगी।

रेलमार्ग – पुणे रेल लाइन द्वारा देश के कई बड़े शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा है। पुणे में लोकल के साथ-साथ एक्सप्रेस ट्रेनें पूरे दिन चलती हैं। आपको भारत के सभी प्रमुख शहरों से पुणे के लिए ट्रेन आसानी से मिल जायेगी।

सडक मार्ग – पुणे देश के प्रमुख हिस्सों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। पुणे से अहमदनगर (115 किमी), मुंबई (120 किमी), औरंगाबाद (215 किमी) और बीजापुर (275 किमी) की दूरी पर हैं। 

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