Dashashwamedh Ghat, Varanasi | दशाश्‍वमेध घाट, वाराणसी

दशाश्‍वमेध घाट, वाराणसी में गंगा नदी के किनारे स्थित सभी घाटों में सबसे प्राचीन और शानदार घाट है। इस घाट का इतिहास हजारों साल पुराना है। यह शहर का ऐसा घाट है जहां पर्यटक सबसे ज्‍यादा भ्रमण करने जाते है, इस घाट में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। यहां होने वाली दैनिक सांयकालीन आरती का हिस्सा बनने देश विदेश से लोगों के आने का क्रम लगातार चलता रहता है। इस घाट पर काली मंदिर, राम पंचायतन व शिव मंदिर स्थापित है। घाट पर मुण्डन, विवाह, गंगा पूजा आदि कार्यो को स्थानीय लोग शुभ मानते हैं।


वाराणसी (काशी) में गंगा तट पर अनेक सुंदर घाट बने हैं, ये सभी घाट किसी न किसी पौराणिक या धार्मिक कथा से संबंधित हैं। वाराणसी में लगभग 84 घाट हैं। ये घाट लगभग 4 मील लम्‍बे तट पर बने हुए हैं। वाराणसी के 84 घाटों में पांच घाट बहुत ही पवित्र माने जाते हैं। इन्‍हें सामूहिक रूप से ‘पंचतीर्थ’ कहा जाता है। ये हैं असी घाट, दशाश्वमेध घाट, आदिकेशव घाट, पंचगंगा घाट तथा मणिकर्णिका घाट। दशाश्‍वमेध घाट पंचतीर्थ घाटों में से एक है। जहां स्नान से मोक्ष और पापों से मुक्ति भी मिलती है। प्राचीन ग्रंथो के मुताबिक राजा दिवोदास द्वारा यहां दस अश्वमेध यज्ञ कराने के कारण इसका नाम दशाश्वमेध घाट पड़ा। एक अन्य मत के अनुसार नागवंशीय राजा वीरसेन ने चक्रवर्ती बनने की आकांक्षा में इस स्थान पर दस बार अश्वमेध कराया था।

यहां होने वाली दैनिक सांयकालीन आरती, जिसे गंगा आरती कहा जाता है, में दिए को जलाकर गंगा में प्रवाहित किया जाता है। गंगा आरती के लिए यह घाट सबसे लोकप्रिय है। पाँच पुजारी कलात्मक तरीके से समारोह का आयोजन करते हैं, जिसमें बड़ी अग्नि-लैंप्स, घंटी और शंख का उपयोग किया जाता है। नदी के किनारे से मंडप को देखने के लिये तीर्थयात्रियों से भरी नौकाएँ पूरे घंटे धीरे-धीरे चलती रहती हैं। यूँ तो ये आरती रोज होती है मगर अमावस्य, छठ और दीपावली के दिन दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती काफी भव्य होती है।

इतिहासकार बताते हैं कि वर्ष 1735 में मराठा बाजीराव पेशवा ने घाट का निर्माण कराया था। तत्पश्चात् इसे इंदौर की महारानी, अहिल्याबाई होल्कर ने 1774 में बनवाया। वर्ष 1965 में राज्य सरकार ने वर्तमान दशाश्वमेध घाट का निर्माण करवाया था।

वाराणसी के दर्शनीय स्थल –

वाराणसी के अन्य दर्शनीय स्थल –

  • लोलार्क कुंड
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय
  • जैन मंदिर
  • गोडोवालिया मार्केट
  • जंतर-मंतर
  • भारत माता मंदिर
  • संकट मोचन मंदिर
  • ललिता गौरी मंदिर
  • कालभैरव मंदिर
  • डंडी राज गणेश मंदिर

वाराणसी जाने का अच्छा समय –
Best Time To Visit Varanasi –

अगर आप वाराणसी सिर्फ काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन करने के लिए जाना चाहते हैं तो आप साल के किसी भी महीने में जा सकते हैं। लेकिन यदि आप काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा वाराणसी के अन्य पर्यटन स्थल देखना चाहते हैं तो वाराणसी जाने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी के बीच होता है। बरसात के समय में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाट और सीढ़ियां डूब जाती हैं जिसके कारण आप वहां का मनमोहक दृश्य नहीं देख पाएंगे। इसके अलावा वाराणसी में मार्च से लेकर सितंबर माह तक गर्मी और उमस भी खूब होती है। इसलिए वाराणसी जाने का उत्तम समय नवंबर से फरवरी के बीच है। नवंबर में हर साल वाराणसी में एक पांच दिवसीय उत्सव गंगा महोत्सव मनाया जाता है, यह उत्सव आने वाले पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है।

वाराणसी कैसे पहुंचें –
How to reach Varanasi –

हवाई मार्ग- लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट वाराणसी का मुख्य एयरपोर्ट है जो विश्वनाथ मंदिर से 25km दूर बाबतपुर में स्थित है।

रेलवे मार्ग – वाराणसी सिटी स्टेशन विश्वनाथ मंदिर से केवल 2km दूर है, जबकि वाराणसी जंक्शन लगभग 6km  दूर है। मंडुआडीह स्टेशन से विश्वनाथ मंदिर 4km है। वाराणसी के ये सभी स्टेशन भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशन से जुड़े हुए हैं, जहां आप ट्रेन से पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग- वाराणसी (राष्ट्रीय राजमार्ग) NH 2 को कलकत्ता से दिल्ली तक, NH 7 से कन्या कुमारी और NH 29 गोरखपुर के साथ जुड़ा हुआ है, जो पूरे देश में सभी प्रमुख सड़कों से जुड़ा हुआ है।

 

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