Baba BasukiNath, Dumka | बाबा बासुकीनाथ मंदिर, दुमका

देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम से करीब 45 किलोमीटर दूर बाबा बासुकीनाथ मंदिर झारखंड के दुमका जिले में स्थित है। बाबा बैद्यनाथ धाम स्थित कामना लिंग के दर्शन करने वाले भक्त अपनी पूजा को पूरा करने के लिए बाबा बासुकीनाथ (नागेश) मंदिर में दर्शन करना नहीं भूलते। बैद्यनाथ धाम में दर्शन करने वालों की पूजा बाबा बासुकीनाथ (नागेश) की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ के दरबार में यदि ‘दीवानी मुकदमों’ की सुनवाई होती है तो बाबा बासुकीनाथ में ‘फौजदारी मुकदमों’ की। शिवभक्तों का विश्वास है कि बाबा बैद्यनाथ के दरबार की अपेक्षा बाबा बासुकीनाथ के दरबार में मांगी गई मुराद जरूर व तुरंत पूरी होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार बासुकी नाम का एक व्यक्ति कंद की खोज में भूमि खोद रहा था। उसी दौरान बासुकी का औजार भूमि में दबे शिवलिंग से टकरा गया और वहां से खून की धारा बहने लगी। बासुकी यह देखकर भयभीत हो गया और भागने लगा। उसी वक्त एक आकाशवाणी हुई, ”भागो मत, यह मेरा निवास स्थान है। तुम पूजा करो।” आकाशवाणी के बाद बासुकी वहां पूजा-अर्चना करने लगा और तभी से शिवलिंग की पूजा होने लगी जो आज भी जारी है। बासुकी के नाम पर इस स्थल का नाम बासुकीनाथ पड़ गया। आज यहां भगवान भोले शंकर और माता पार्वती का विशाल मंदिर है। मुख्य मंदिर के नजदीक शिव गंगा है, जहां भक्त स्नान कर अपने आराध्य को बेल पत्र, पुष्प और गंगाजल समर्पित करते हैं तथा अपने कष्ट, क्लेश दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

बासुकीनाथ मंदिर के पुजारी  के मुताबिक बासुकीनाथ में शिव का रूप नागेश का है। वह बताते हैं कि यहां पूजा में अन्य सामग्रियां तो चढ़ाई ही जाती हैं परंतु यहां दूध से पूजा करने का काफी महत्व है। मान्यता है कि नागेश के रूप के कारण दूध से पूजा करने से भगवान शिव शंकर खुश रहते हैं। वह कहते हैं कि शिव के गले में लिपटे नाग को भी दूध पसंद होता है। उन्होंने बताया कि वर्ष में यहां एक बार महारूद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है जिसमें काफी मात्रा में दूध चढ़ाया जाता है। उस दिन यहां दूध की नदी सी बह जाती है। वैसे इस रूद्राभिषेक में घी, मधु तथा दही का भी प्रयोग किया जाता है परंतु दूध ब़डी मात्रा में चढ़ाया जाता है। इस अनुष्ठान के समय भक्तों की भारी भी़ड इकट्ठी होती है। उन्होंने बताया कि बासुकीनाथ मंदिर में पूजा नहीं करने वालों की बाबा बैद्यनाथ धाम की पूजा अधूरी मानी जाती है।

बाबा बासुकीनाथ मंदिर यात्रा करने का सबसे अच्छा समय –
Best Time To Visit Baba BasukiNath Temple –

अगर आप दुमका में स्थित बासुकीनाथ मंदिर जाने की योजना बना रहें हैं तो आपको बता दें कि यहां की बाबा धाम यात्रा करने का सबसे अच्छा समय सर्दियों में है। ग्रीष्मकाल के समय यहां बहुत तेज गर्मी पड़ती है और मानसून भी आपकी यात्रा का मजा किरकिरा कर सकता है। इसलिए हम आपको सलाह देना चाहते हैं कि आप इस पवित्र मंदिर की यात्रा अक्टूबर से मार्च तक के महीनों के दौरान करें।

बाबा बासुकीनाथ मंदिर के अन्य पर्यटन स्थल –
Other Places To Visit near Baba BasukiNath Temple –

बाबा बासुकीनाथ मंदिर  कैसे पहुंचे
How To Reach Baba BasukiNath Temple –

हवाई मार्ग – दुमका का निकटतम हवाई अड्डा राँची (Ranchi) तथा, पटना (Patna) है। पटना/राँची  से आप ट्रैन या टैक्सी से देवघर पहुंच सकते है। पटना से दुमका की दुरी 320 Km तथा राँची से दुमका की दुरी 280 Km है।

रेलवे मार्ग – दुमका के निकटतम रेलवे स्टेशन जसीडीह {Jasidih jn (JSME)} है। यह हावड़ा पटना दिल्ली लाइन पर है। सभी प्रमुख शहरो से जसीडीह के लिए ट्रेनें चलती हैं। जसीडीह से दुमका की दुरी 80 किमी है। जसीडीह रेल्वे स्टेशन से दुमका पहुंचने के लिए ऑटो रिक्शा या टैक्सी मिल जाती है।

सड़क मार्ग देवघर सीधे बड़े शहरो से जुड़ा हुआ है। कोलकाता (373 किमी), पटना (281 किमी), (रांची 250 किमी) तक सड़क से जुड़ा हुआ है। देवघर से धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर, रांची और बर्धमान (पश्चिम बंगाल) तक नियमित बसें चलती हैं। देवघर से दुमका की दुरी 65 Km है।

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