Saptashrungi Devi Temple, Nashik | सप्तश्रृंगी देवी मंदिर, नासिक

सप्तश्रृंगी देवी मंदिर महाराष्ट्र राज्य के नासिक से 65 km दूर वणी गांव में स्थित है। यह मंदिर 4650 फुट की ऊंचाई पर सह्याद्री पर्वत श्रृंखला स्थित है। सप्तशृंग” शब्द का अर्थ है “सात शिखर/ चोटी, देवी का मंदिर 7 चोटियों से घिरा हुआ है। इस मंदिर के एक तरफ गहरी खाई और दूसरी ओर ऊंचा पहाड़ मौजूद है। सप्तश्रृंगी को अर्धशक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है। महाराष्ट्र के ‘साढ़े तीन शक्ति पीठों’ में से अर्धशक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध सप्तश्रृंगी देवी मंदिर में पूरे वर्ष श्रद्धालु दर्शन करते हैं। अन्य तीन शक्तिपीठ कोल्हापुर की महालक्ष्मी , तुलजापुर की तुलजा भवानी और माहुर की रेणुका हैं । लेकिन आदिशक्ति का मूल स्थान सप्तश्रृंगी है। मान्यता है कि यहां देवी की गोद भराई से होती है संतान की प्राप्ति।


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सप्तश्रृंगी देवी की उत्पत्ति ब्रह्मा के कमंडल से हुई थी। सप्तश्रृंगी देवी की यहां महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती के त्रिगुण रूप में भी आराधना की जाती है। यह भी कहा जाता है कि भगवान राम, सीता और लक्ष्मण नासिक के तपोवन में रहने के दौरान यहां आए थे। देवी की यह मूर्ति स्वयंभू है। ऐसी दंतकथा है कि किसी भक्त द्वारा मधुमक्खी का छत्ता तोड़ते समय उसे यह देवी की मूर्ति दिखाई दी थी। पर्वत में बसी इस देवी की मूर्ति आठ फुट ऊँची है। इसकी अठारह भुजाएँ हैं। जिनमें उन्होंने अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र पकड़े हुए है। देवी की इन 18 भुजाओं के बारे में कहा जाता है कि सभी देवताओं ने महिषासुर राक्षस से लड़ने के लिए उन्हें अपने शस्त्र प्रदान दिए थे। इसमें शंकरजी का त्रिशूल, विष्णु जी का चक्र, वरुण का शंख, अग्निदेव का दाहकत्व, वायु का धनुष-बाण, इंद्र का वज्र और घंटा, यम का दंड, दक्ष प्रजापति की स्फटिक माला, ब्रह्मदेव का कमंडल, सूर्य की किरणें, काल स्वरूपी देवी की तलवार, क्षीरसागर का हार, कुंडल और कड़ा, विश्वकर्मा भगवान का तीक्ष्ण परशु और कवच, समुद्र का कमल हार, हिमालय का सिंह वाहन और रत्न शामिल हैं।

पुराणों में यह वर्णन मिलता है कि महिषासुर राक्षस के विनाश के लिए देवी-देवताओं ने मां की आराधना की, जिसके बाद देवी यहां सप्तश्रृंगी रूप में प्रकट हुई थीं और इसी जगह पर उन्होंने महिषासुर ये युद्ध करते हुए उसका वध किया था।

मुख्य मंदिर तक जाने के लिए करीब 472 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। चैत्र और अश्विन नवरात्र में यहां विशेष उत्सव होते हैं। एक साल में यहां देवी के दो रूप नजर आते हैं। कहते हैं कि चैत्र में देवी का हंसते हुए तो अश्विन नवरात्र में गंभीर रूप नजर आता है। मंदिर की सीढ़ियों के शुरू होते ही बायीं तरफ महिषासुर मंदिर नामक एक छोटा मंदिर भी बना हुआ है जिसमें महिष(भैंसा) के पीतल से बने कटे हुए शीष की पूजा की जाती थी। ऐसी मान्यता है कि देवी ने इसी स्थान पर महिषासुर का मर्दन(वध) किया और तभी से मां को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी पूजा जाता है। बीच में जाते हुए एक गणेश-मंदिर और एक राम मंदिर के भी दर्शन होते हैं। मंदिर में शक्तिद्वार, सूर्यद्वार और चंद्रद्वार तीन द्वार हैं। देवी के दर्शन इन तीन दरवाजों से होते हैं। इस पर्वत पर पानी के 108 कुंड हैं, जो इस स्थान की सुंदरता को कई गुना बड़ा देते हैं।

मंदिर की समय सारिणी

देवी सप्तश्रृंगी का मंदिर सुबह 5 बजे खुलता है। छह बजे काकड़ आरती हुई । देवी का महापूजा आठ बजे शुरू होता है। इस पूजा में , मूर्ति को पंचामृत स्नान, पैठणी या शालू से सजाया जाता है । पान मुंह को दिया जाता है। पेडों और विभिन्न फलों के प्रसाद दिखाए जाते हैं। बारह बजे महाविद्या आरती हुई। पड़ोसी शाम 7.30 बजे हैं और मंदिर के दरवाजे बंद हैं। सप्तश्रृंगी का प्रसाद पूरनपोली है।

नासिक – पंचवटी के अन्य पर्यटन स्थल –
Other Places To Visit In Nashik – Panchavati –

नासिक – पंचवटी घूमने जाने का सबसे अच्छा समय –
Best Time to Visit Nashik-Panchavati –

पंचवटी की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी के बीच का माना जाता हैं क्योंकि इस समय के दौरान आप पर्यटक पंचवटी और इसके आसपास के समस्त घूमने वाली जगहों का दौरा कर सकते हैं। हालाकि बारिश के दौरान भी पंचवटी का नजारा देखने लायक होता हैं क्योंकि बरसात के मौसम यहाँ की प्राकृतिक वादिया हरियाली से भरपूर होती हैं।

नासिक – पंचवटी कैसे पहुंचें –
How To Reach Nashik-Panchavati –

हवाई मार्ग पंचवटी से निकटतम हवाई अड्डा नासिक (Nasik) 20Km ,शिरडी (Shirdi) 90Km मुंबई (Mumbai) 170Km है। नासिक हवाई अड्डे से आप पंचवटी के लिए आप टैक्सी किराए पर लेकर यहां पहुंच सकते हैं।

रेलवे मार्ग पंचवटी का निकटतम रेलवे स्टेशन नासिक रोड (Nasik Road) रेलवे स्टेशन (NK) है जो लगभग 10Km दूर है। इसके बाद यहां से टैक्सी लेकर पंचवटी जा सकते हैं।

सड़क मार्ग NH – 160 राष्ट्रीय राजमार्ग पथ ठाणे कासर – इगतपुरी के माध्यम से मुंबई से नासिक को जोड़ता है। पुणे, नासिक से लगभग 220 km दूर है, वहाँ राज्य कि सरकारी और निजी बसों द्वारा राज्य के कई शहरों और कस्बों में नासिक होते हुए जाया जा सकता है।

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