Trimbakeshwar Jyotirlinga – How to Reach ?| त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग – कैसे पहुंचे ?

भारत को अगर मंदिरों का देश कहें तो कुछ गलत ना होगा। पग-पग पर मंदिर और कण-कण में देवताओं का वास.. यही तो है भारत। यहां हर मंदिर का अपना एक अलग इतिहास है, अपनी एक अलग कहानी है। ऐसा ही एक मंदिर है त्र्यंबकेश्वर मंदिर।  नासिक शहर से 37Km दूर यह मंदिर , भगवन शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में से आठवां ज्योतिर्लिंग है।

बेहद पवित्र मानी जाने वाली गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के पास मौजूद ये मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र माना जाता है जहां देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि इसमें भगवान ब्रह्मा, विष्णु और भगवान रुद्र के प्रतीक (Symbol) तीन चेहरे समाहित हैं। यही केवल ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहाँ तीनो ब्रह्मा, विष्णु और महेश साथ विराजते हैं। इसी क्षेत्र में अहिल्या नाम की एक नदी गोदावरी में मिलती है। कहा जाता है‍ कि दंपत्ति इस संगम स्थल पर संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। यहां गाय को हरा चारा खिलाने का बेहद चलन है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग  जाने का सबसे अच्छा समय –
Best Time To Visit Trimbakeshwar Jyotirlinga –

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग नाशिक की यात्रा का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है क्योंकि इन महीनों में सर्दियां हल्की होती हैं। यह यात्रियों के लिए पीक सीजन है। इस दौरान यहां सभी चीजें महंगी (Expensive) होती हैं और भीड़ भी बहुत ज्यादा होती है। हालांकि, यदि आपके पास कम बजट है, तो मानसून का मौसम आपके लिए उपयुक्त है। आप जुलाई से सितंबर के बीच यहां आ सकते हैं। इसके अलावा श्रद्धालु पूरे साल इस मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं इसलिए आपको जब भी समय मिले आप यहां जाने की प्लानिंग कर सकते हैं।

त्रयंबकेश्वर मंदिर में होनी वाली पूजा-

महामृत्युंजय पूजा – यह पूजा पुरानी बीमारियों से छुटकारा पाने और एक स्वस्थ जीवन के लिए की जाती है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महामृत्युंजय पूजा सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच होती है।

रुद्राभिषेक पूजा – यह अभिषेक पंचामृत यानि दूध, घी, शहद, दही और शक्कर के साथ किया जाता है। इस दौरान कई मंत्रों और श्लोकों का पाठ भी किया जाता है। यह 7:00 से 9:00 बजे के बीच भी किया जाता है।

लघु रुद्राभिषेक पूजा यह अभिषेक स्वास्थ्य (Health) और धन की समस्याओं (Monetary Problem) को हल करने के लिए किया जाता है। यह कुंडली में ग्रहों के बुरे प्रभाव को भी दूर करता है।

महा रुद्राभिषेक पूजा –  इस पूजा में मंदिर में ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद का पाठ किया जाता है।

काल सर्प पूजा – यह पूजा राहु और केतु की दशा को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। काल सर्प दोष से ग्रसित लोग इससे मुक्ति पाने के लिए अनंत कालसर्प, कुलिक कालसर्प, शंखापान कालसर्प, वासुकी कालसर्प, महा पद्म कालसर्प और तक्षक कालसर्प (Takshak Kaal Sarp) नाम की पूजा की जाती है।

नारायण नागबली पूजा – यह पूजा पितृ दोष (Pitru Dosh) और परिवार पर पूवर्जों के श्राप से बचने के लिए किया जाता है।

मंदिर की समय सारणी

मंदिर खुलने का समय – 5:30 AM
सामान्य दर्शन और अभिषेक – 5:30 AM से 9:00 PM
स्पेशल पूजा समय – सुबह 7 से 9
मध्यान पूजा – दोपहर 1 से 1:30 तक
मुकुट दर्शन – शाम 4:30 से 5:00

त्र्यंबकेश्वर के अन्य पर्यटन स्थल –
Other Places To Visit In Trimbakeshwar –

त्र्यंबकेश्वर मंदिर कैसे पहुंचें –
How To Reach Trimbakeshwar Temple –

हवाई मार्ग  त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग  से निकटतम हवाई अड्डा नासिक (Nasik) 34Km ,शिरडी (Shirdi) 116Km मुंबई (Mumbai) 178Km है। नासिक हवाई अड्डे से आप त्रयंबकेश्वर के लिए आप टैक्सी किराए पर लेकर यहां पहुंच सकते हैं।

 रेलवे मार्ग त्र्यंबकेश्वर में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन नासिक रोड (Nasik Road) रेलवे स्टेशन (NK) है जो लगभग 37 Km दूर है। इसके बाद यहां से टैक्सी लेकर  त्र्यंबकेश्वर जा सकते हैं।

सड़क मार्ग त्र्यंबकेश्वर नासिक के पास स्थित है। यह नासिक के मुख्य शहर के केंद्र से सिर्फ 37 Kmदूर है। आप रोडवेज के माध्यम से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा आप त्र्यंबकेश्वर पहुँचने के लिए बस या टैक्सी (Taxi) का भी सहारा ले सकते हैं। त्र्यंबकेश्वर में Self-Drive करने के लिए सड़कें अच्छी हैं।

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