Kedarnath Jyotirlinga | केदारनाथ  ज्योतिर्लिंग का इतिहास

गिरिराज हिमालय की केदार नामक चोटी पर स्थित देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से पांचवा ज्योतिर्लिंग हैं – केदारनाथ  ज्योतिर्लिंग। केदारनाथ का मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के रुद्रप्रयाग नगर में है। केदारनाथ में शिव का रुद्ररूप निवास करता है, इसलिए इस संपूर्ण क्षेत्र को रुद्रप्रयाग कहते हैं। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ-2  चार धाम और पंच केदार में से भी एक है।

कहते हैं कि केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्राचीन मंदिर का निर्माण पांडवों ने कराया था। अभिमन्यु के पौत्र जनमेजय ने इसका जीर्णोद्धार किया । बाद में 8वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने एक नए मंदिर का निर्माण कराया, जो 400 वर्ष तक बर्फ में दबा रहा। केदारनाथ मन्दिर के समीप ही आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि हैं। शंकराचार्य एक प्रसिद्ध हिन्दू सन्त थे। चारों धामों की खोज के उपरान्त 32 वर्ष की आयु में उन्होनें इसी स्थान पर समाधि ली थी।

यह उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है, जो कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है। ये शिलाखंड भूरे रंग के हैं। मंदिर लगभग 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना है। केदारनाथ धाम तीन तरफ पहाड़ों से घिरा है। एक तरफ है करीब 22 हजार फुट ऊंचा केदारनाथ, दूसरी तरफ है 21 हजार 600 फुट ऊंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ है 22 हजार 700 फुट ऊंचा भरतकुंड। न सिर्फ तीन पहाड़ बल्कि पांच ‍नदियों का संगम भी है यहां- मं‍दाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी। इन नदियों में से कुछ का अब अस्तित्व नहीं रहा लेकिन अलकनंदा की सहायक मंदाकिनी आज भी मौजूद है। इसी के किनारे है केदारेश्वर धाम।

केदारनाथ धाम की महिमा का वर्णन करते हुए ‘स्कंद पुराण’ में भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं, ‘हे प्राणेश्वरी! यह क्षेत्र उतना ही प्राचीन है, जितना कि मैं हूं। मैंने इसी स्थान पर सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा के रूप में परब्रह्मत्व को प्राप्त किया, तभी से यह स्थान मेरा चिर-परिचित आवास है। यह केदारखंड मेरा चिरनिवास होने के कारण भू-स्वर्ग के समान है।’ केदारखंड में उल्लेख है,
अकृत्वा दर्शनम् वैश्वय केदारस्याघनाशिन:,
यो गच्छेद् बदरी तस्य यात्रा निष्फलताम् व्रजेत्’
अर्थात् केदारनाथ भगवान के दर्शन किए बिना यदि कोई बदरीनाथ क्षेत्र की यात्रा करता है तो उसकी यात्रा व्यर्थ हो जाती है। केदारनाथ सहित नर-नारायण-मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों के नाश पूर्वक जीवन मुक्ति की प्राप्ति बतलाया गया है।

केदारनाथ मंदिर का इतिहास-

केदारनाथ धाम विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। इस जगह की खोज पांडवों ने की थी। दरअसल वे अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भोलेनाथ को ढूंढ़ते हुए केदारनाथ पहुंचे थे। पुराणों के अनुसार महाभारत युद्ध के दौरान पांडवों ने अपने भाई बंधुओं की हत्या की थी। उनको ऋषियों ने इस पापमुक्ति के लिए भगवान शिव की शरण में जाने का सुझाव दिया। इस पाप के बोझ से मुक्त होने के लिए पांडव भगवान शिव जी के दर्शन के लिए काशी पहुंचे । भगवान शिव पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वहां से वे कैलाश चले गए। भोलेनाथ का पीछा करते हुए पांडव कैलाश भी पहुंच गए। बाद में शिव जी ने अपना रूप बदलकर पांडवों को बैल के रूप में केदार की चट्टानों में आखिर में दर्शन दिए थे। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं। केदरानाथ मंदिर महज एक नहीं बल्कि पांच अलग-अलग मंदिरों का संमूह है। इसलिए इसे पंच केदार के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के गर्भ गृह के बाहर पांच पांडवों `के साथ द्रोपदी की मूर्ति भी स्थापित की गई है।

केदारनाथ यात्रा का समय-

यहां सर्दियों में भारी बर्फ और बारिश में जबरदस्त पानी रहता है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण केदारनाथ  धाम की यात्रा मई से अक्टुम्बर तक 6 महीने ही चलती है। अक्षय तृतीया को अप्रैल या मई के महीने से यात्रा की शुरुवात होती है। कार्तिक पूर्णिमा अक्टूबर या नवंबर में केदारनाथ के कपाट बंद कर दिए जाते है। हर साल केदारनाथ के कपाट खोलने और कपाट बंद होने की तारिख घोषित की जाती है। कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को ‘उखीमठ’ में लाया जाता हैं। इस प्रतिमा की पूजा यहाँ भी रावल जी करते हैं। 6 माह मंदिर और उसके आसपास कोई नहीं रहता है, लेकिन आश्चर्य की 6 माह तक दीपक भी जलता रहता और निरंतर पूजा भी होती रहती है। कपाट खुलने के बाद यह भी आश्चर्य का विषय है कि वैसी ही साफ-सफाई मिलती है जैसे छोड़कर गए थे।

केदारनाथ  मंदिर समय सारणी

मन्दिर दर्शनार्थियों के लिए सुबह 6.00 बजे से खुलता है।
दोपहर 3 बजे से 4 बजे विशेष पूजा होती है और फिर विश्राम के लिए मंदिर बन्द कर दिया जाता है।
शाम 5 बजे जनता के दर्शन के लिए मन्दिर फिर से खोला जाता है।
पाँच मुख वाली भगवान शिव की प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके 7:30 बजे से 8:30 बजे तक आरती होती है।
रात को 8.30 के बाद मंदिर फिर से बंद कर दिया जाता है।

केदारनाथ मंदिर कैसे पहुंचे

रेलवे मार्ग–  केदारनाथ पहुंचने के लिए अगर आप रेल मार्ग अपनाना चाहते हैं तो हरिद्वार या ऋषिकेश रेलवे स्‍टेशन निकटतम रेलवे स्‍टेशन है। यहां से टैक्‍सी का सहारा लेकर गौरीकुंड पहुंचेंगे इसके बाद वहां से केदारनाथ धाम। ऋषिकेश से गौरीकुंड की दूरी 96 KM है।

सड़क मार्ग
अगर आप सड़क मार्ग से जाना चाहते हैं तो आप पहले गौरीकुंड पहुंचेंगे। इसके बाद आपको यहां से केदारनाथ जाने के साधन मिल जाएंगे। केदारनाथ से चंडीगढ़ (218), दिल्ली से (295), नागपुर से (1066), बेंगलुरू से (1980), ऋषिकेश से (105) किमी पड़ता है।

हवाई मार्ग

निकटतम हवाई अड्डा देहरादून (Dehradun) है। यहां से केदारनाथ की दूरी 109KM है। यहां से आपको गौरीकुंड के लिए वाहन मिल जाएंगे। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम की दूरी 10KM है।

गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल यात्रा-

गौरीकुंड से केदारनाथ का रास्ता पैदल का है। गौरीकुंड से केदारनाथ 10KM की दुरी पर स्थित है। केदारनाथ की उचाई समुद्री लेवल से 3,583 m (11,755 ft) है। गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल या घोड़े से या हेलीकॉप्टर  से तय करना होता है। गौरीकुंड से केदारनाथ घोड़े से पहुंचने के लिए 4 से 5 घंटे लगते है। पैदल चलकर स्वस्थ व्यक्ति को  7 घंटे लगते है। केदारनाथ यात्रा ट्रेक पर कई जगह तीव्र उतार चढाव है। केदारनाथ यात्रा ट्रेक पर बीच में रामबाड़ा, जंगल-चट्टी,भीमबली,छोटा लीनचौली, छानी कैंप,रुद्रा पॉइंट प्रमुख स्थल पड़ते है। ट्रेक पर जगह जगह खाने- पीने  के स्टॉल और अस्थाई टॉइलेट बनाये होते है। जंगल चट्टी और लिनचौली में जीएमवीएन (Garhwal Mandal Vikas Nigam) के टेंट बने है। यहाँ रात को रुकने की भी व्यवस्था होती है।

हेलीकॉप्टर से केदारनाथ यात्रा-

केदारनाथ जाने के लिए फाटा से हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है। फाटा गुप्तकाशी से 14 किमी की दुरी पर स्थित है। फाटा से गौरीकुंड 18 किमी पड़ता है। फाटा में रात रुकने के लिए होटल भी है। हेलीकॉप्टर का टिकट का किराया प्रति व्यक्ति 3500 रु. पड़ता है। प्रति वर्ष उत्तराखंड सरकार द्वारा हेलीकॉप्टर टिकट की दरे तय की जाती है। फाटा से हेलीकॉप्टर द्वारा केदारनाथ 10 मिनट में पहुंच जाते है।

ठहरने की व्यवस्था-

जीएमवीएन (Garhwal Mandal Vikas Nigam) के गेस्ट हाउस के अलावा यहां कई साफ-सुथरी धर्मशालाएं भी हैं। इसके आलवा आपको गौरीकुंड से केदारनाथ तक मुफ्त लंगर मिलेंगे, जबकि ठहराव के लिए टेंट की व्यवस्था होती है। यात्रा से पहले सेहत की जांच भी यहां मुफ्त में करा सकते हैं। कमरा बुक करने के लिए GMVN की वेब साइट http://www.gmvnl.in/newgmvnपर जाकर कर सकते है।

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