How to reach Kedarnath Jyotirlinga | केदारनाथ ज्योतिर्लिंग कैसे पहुंचे ?

देश में भगवान शिव के कई मंदिर हैं। लेकिन केदारनाथ का धार्मिक महत्व सर्वोपरी है। धर्मशास्त्रों में केदारनाथ का बेहद ही महात्म्य बताया गया है। केदारनाथ के दर्शन से सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। भगवान शिव की इस स्थली का धार्मिक महत्व महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यह धार्मिक स्थल हिमालय की गोद में बसा है। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ-2  चार धाम और पंच केदार में से भी एक है।

केदारनाथ यात्रा का समय-

यहां सर्दियों में भारी बर्फ और बारिश में जबरदस्त पानी रहता है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण केदारनाथ  धाम की यात्रा मई से अक्टुम्बर तक 6 महीने ही चलती है। अक्षय तृतीया को अप्रैल या मई के महीने से यात्रा की शुरुवात होती है। कार्तिक पूर्णिमा अक्टूबर या नवंबर में केदारनाथ के कपाट बंद कर दिए जाते है। हर साल केदारनाथ के कपाट खोलने और कपाट बंद होने की तारिख घोषित की जाती है। कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को ‘उखीमठ’ में लाया जाता हैं। इस प्रतिमा की पूजा यहाँ भी रावल जी करते हैं। 6 माह मंदिर और उसके आसपास कोई नहीं रहता है, लेकिन आश्चर्य की 6 माह तक दीपक भी जलता रहता और निरंतर पूजा भी होती रहती है। कपाट खुलने के बाद यह भी आश्चर्य का विषय है कि वैसी ही साफ-सफाई मिलती है जैसे छोड़कर गए थे।

केदारनाथ मंदिर कैसे पहुंचे

रेलवे मार्ग–  केदारनाथ पहुंचने के लिए अगर आप रेल मार्ग अपनाना चाहते हैं तो हरिद्वार या ऋषिकेश रेलवे स्‍टेशन निकटतम रेलवे स्‍टेशन है। यहां से टैक्‍सी का सहारा लेकर गौरीकुंड पहुंचेंगे इसके बाद वहां से केदारनाथ धाम। ऋषिकेश से गौरीकुंड की दूरी 96 KM है।

सड़क मार्गअगर आप सड़क मार्ग से जाना चाहते हैं तो आप पहले गौरीकुंड पहुंचेंगे। इसके बाद आपको यहां से केदारनाथ जाने के साधन मिल जाएंगे। केदारनाथ से चंडीगढ़ (218), दिल्ली से (295), नागपुर से (1066), बेंगलुरू से (1980), ऋषिकेश से (105) किमी पड़ता है।

हवाई मार्गनिकटतम हवाई अड्डा देहरादून (Dehradun) है। यहां से केदारनाथ की दूरी 109KM है। यहां से आपको गौरीकुंड के लिए वाहन मिल जाएंगे। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम की दूरी 10KM है।

गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल यात्रा-

गौरीकुंड से केदारनाथ का रास्ता पैदल का है। गौरीकुंड से केदारनाथ 10KM की दुरी पर स्थित है। केदारनाथ की उचाई समुद्री लेवल से 3,583 m (11,755 ft) है। गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल या घोड़े से या हेलीकॉप्टर  से तय करना होता है। गौरीकुंड से केदारनाथ घोड़े से पहुंचने के लिए 4 से 5 घंटे लगते है। पैदल चलकर स्वस्थ व्यक्ति को  7 घंटे लगते है। केदारनाथ यात्रा ट्रेक पर कई जगह तीव्र उतार चढाव है। केदारनाथ यात्रा ट्रेक पर बीच में रामबाड़ा, जंगल-चट्टी,भीमबली,छोटा लीनचौली, छानी कैंप,रुद्रा पॉइंट प्रमुख स्थल पड़ते है। ट्रेक पर जगह जगह खाने- पीने  के स्टॉल और अस्थाई टॉइलेट बनाये होते है। जंगल चट्टी और लिनचौली में जीएमवीएन (Garhwal Mandal Vikas Nigam) के टेंट बने है। यहाँ रात को रुकने की भी व्यवस्था होती है।

केदारनाथ  मंदिर समय सारणी

मन्दिर दर्शनार्थियों के लिए सुबह 6.00 बजे से खुलता है।
दोपहर 3 बजे से 4 बजे विशेष पूजा होती है और फिर विश्राम के लिए मंदिर बन्द कर दिया जाता है।
शाम 5 बजे जनता के दर्शन के लिए मन्दिर फिर से खोला जाता है।
पाँच मुख वाली भगवान शिव की प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके 7:30 बजे से 8:30 बजे तक आरती होती है।
रात को 8.30 के बाद मंदिर फिर से बंद कर दिया जाता है।

हेलीकॉप्टर से केदारनाथ यात्रा-

केदारनाथ जाने के लिए फाटा से हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है। फाटा गुप्तकाशी से 14 किमी की दुरी पर स्थित है। फाटा से गौरीकुंड 18 किमी पड़ता है। फाटा में रात रुकने के लिए होटल भी है। हेलीकॉप्टर का टिकट का किराया प्रति व्यक्ति 3500 रु. पड़ता है। प्रति वर्ष उत्तराखंड सरकार द्वारा हेलीकॉप्टर टिकट की दरे तय की जाती है। फाटा से हेलीकॉप्टर द्वारा केदारनाथ 10 मिनट में पहुंच जाते है।

ठहरने की व्यवस्था-

जीएमवीएन (Garhwal Mandal Vikas Nigam) के गेस्ट हाउस के अलावा यहां कई साफ-सुथरी धर्मशालाएं भी हैं। इसके आलवा आपको गौरीकुंड से केदारनाथ तक मुफ्त लंगर मिलेंगे, जबकि ठहराव के लिए टेंट की व्यवस्था होती है। यात्रा से पहले सेहत की जांच भी यहां मुफ्त में करा सकते हैं। कमरा बुक करने के लिए GMVN की वेब साइट http://www.gmvnl.in/newgmvn/ पर जाकर कर सकते है।

Note – यात्रा शुरू करने से पहले आपको सोनप्रयाग से बॉयोमेट्रिक कार्ड प्राप्त करना होता है। बायोमैट्रिक कार्ड का ऑफिस सुबह 6 बजे खुलता है। बायोमेट्रिक कार्ड ऑफिस में ही ब्लड प्रेशर चेक करके हेल्थ सेर्टिफिकेट मिलता है। अगर मेजर प्रॉब्लम रहा तो केदारनाथ ट्रेक पर आप जा नहीं सकते।

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