How to Reach Mallikarjuna Jyotirlinga ? |श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिग कैसे पहुंचे ?

दक्षिण भारत में कैलाश के नाम से मशहूर आंध्र प्रदेश का श्रीमल्लिकार्जुन मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिगों में से द्वितीय ज्योतिर्लिग है। यह ज्योतिर्लिग कृष्णा नदी के तट पर श्रीसैलम नाम के पर्वत पर स्थित है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन करने से सात्विक मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

कैसे पहुंचे मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिग- 

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिग आंध्र प्रदेश के श्रीसैलम में मौजूद है। आप सड़क, रेल और हवाई यात्रा के जरिए इस ज्योतिर्लिग के दर्शन कर सकते हैं।

सड़क परिवहन  – सड़क के जरिए श्रीसैलम पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। विजयवाड़ा, तिरुपति, अनंतपुर, हैदराबाद और महबूबनगर से नियमित रूप से श्रीसैलम के लिए सरकारी और निजी बसें चलाई जाती हैं। ‘

वायु मार्ग  – श्रीसैलम से 137 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैदराबाद का राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। यहां से आप बस या फिर टैक्सी के जरिए मल्लिकार्जुन पहुंच सकते हैं।

 रेल मार्ग – यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन मर्कापुर रोड है जो श्रीसैलम से 62 किलोमीटर की दूरी पर है। फिर टैक्सी के जरिए मल्लिकार्जुन पहुंच सकते हैं

ज्योतिर्लिंग तक पहुंचने के लिए घने जंगलों के बीच होकर सड़क मार्ग द्वारा जाया जाता है। यह रास्ता करीब 40 किलोमीटर घने जंगलों से होकर जाता है। घने जंगलों के बीच से रास्ता होने के वजह से शाम 6 बजे के बाद वन क्षेत्र में प्रवेश वर्जित होता है और सुबह 6 बजे के बाद ही इसके गेट दोबारा खोले जाते हैं। इस जंगली रास्ते को पार करके कुछ ही किलोमीटर के बाद शैल बांध से 290 मीटर की ऊंचाई से गिरते प्रबल जलावेग नज़र आता है। इस जलावेग को देखने के लिए पर्यटकों व दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है।

समय सारणी

मंदिर के कपाट सुबह 4:30 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक खुले रहते हैं
इसके बाद शाम 4:30 से रात्रि 10 बजे तक खुले रहते हैं।

आरती समय: सुबह 6 बजे और शाम को 5:30 बजे

दर्शन समय: सुबह 6:30 बजे से दोपहर 3:30 तक और शाम 6 बजे रात्रि 10 बजे तक

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