TULSI BENEFITS | तुलसी का काढ़ा | काढ़ा बनाने की विधि

तुलसी एक राम बाण औषधि है। यह प्रकृति की अनूठी देन है। इसकी जड़,तना,पत्तियां तथा बीज उपयोगी होते हैं।
रासायनिक द्रव्यों एवं गुणों से भरपूर, मानव हितकारी तुलसी रूखी गर्म उत्तेजक, रक्त शोधक,कफ व शोधहर चर्म रोग निवारक एवं बलदायक होती है।

यह कुष्ठ रोग का शमन करती है। इसमें कीटाणुनाशक अपार शक्ति हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि तपेदिक , मलेरिया व प्लेग के कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता तुलसी में विद्यमान है। शरीर की रक्त शुद्धि, विभिन्न प्रकार के विषों की शामक, अग्निदीपक आदि गुणों से परिपूर्ण है तुलसी। इसको छू कर आने वाली वायु स्वच्छता दायक एवं स्वास्थ्य कारक होती है। भारत देश में तो तुलसी को साक्षात ईश्वर का दर्जा दिया गया है।

तुलसी के पत्ते, इसके रस और इसकी चाय को सही तरीके से इस्तेमाल में लाया जाए तो यह कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकती है|तुलसी चाय या तुलसी काढ़े को बच्चों और वयस्कों को दिया जा सकता है जब सर्दी या खांसी के पहले लक्षण दिखाई दे

तुलसी का काढ़ा बनाने के लिए सामग्री : 

तुलसी (भारतीय तुलसी) पत्तियां – 10-12 पत्तियां
पानी – 4 कप
काली मिर्च के दाने – 2-3 (कुचला हुवा )
गुड़ – 2 चम्मच

बनाने का तरीका :

  • सबसे पहले तुलसी की पत्तियों को अच्छी तरह धो लें
  • एक पैन में पानी डालकर मीडियम आंच पर उबलने के लिए रखें
  • जब हलका गरम हो जाए तो इसमें तुलसी की पत्तियां, और अदरक डालकर 4-5 मिनट तक उबालें
  • इसके बाद इसमें कुचले हुवे काली मिर्च के दाने और गुड़ डालकर 1-2 मिनट बाद आंच बंद कर दें
  • काढ़े को चम्मच से चलाते रहें ताकि गुड़ घुल जाए
  • अगर फ्लेवर चाहिए तो इसमें एक इलायची भी कूटकर डाल दें
  • जब पानी रंग बदले , मिश्रण छानले

तुलसी काढ़ा या तुलसी चाय सेवन करने के लिए तैयार हैं।

बड़ो के लिए गरम रखें और बच्चों के लिए गुनगुना परोसे ।

आयुर्वेद के अनुसार तुलसी, हल्की, गर्म, तीखी कटु, रूखी, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाली होती है तुलसी कीडे़ को नष्ट करने वाली, दुर्गंध को दूर करने वाली, कफ को निकालने वाली तथा वायु को नष्ट करने वाली होती है। यह पसली के दर्द को मिटाने वाली, हृदय के लिए लाभकारी, मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट होना) को ठीक करने वाली, विष के दोषों को नष्ट करने वाली और त्वचा रोग को समाप्त करने वाली होती है। यह हिचकी, खांसी, दमा, सिर दर्द, मिर्गी, पेट के कीड़े, विष विकार, अरुचि (भोजन करने की इच्छा न करना), खून की खराबी, कमर दर्द, मुंह व सांस की बदबू एवं विषम ज्वर आदि को दूर करती है। इससे वीर्य बढ़ता है, उल्टी ठीक होती है, पुराना कब्ज दूर होता है, घाव ठीक होता है, सूजन पचती है, जोड़ों का दर्द, मूत्र की जलन, पेशाब करने में दर्द, कुष्ठ एवं कमजोरी आदि रोग ठीक होता है। यह जीवाणु नष्ट करती है और गर्भ को रोकती है।

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