Seven Wonders of the World -दुनिया के सात अजूबे

दुनिया के सात अजूबे ऐसे प्राकृतिक और मानव निर्मित संरचनाओं का संकलन है। जो अपनी अद्भुत कला संरचना और खूबसूरती से मनुष्य को आश्चर्यचकित करती है।

लगभग 2200 साल पहले यूनान के विद्वानों (हेरोडोटस और कल्लिमचुस ) ने दुनिया के सात अजूबों की सूची तैयार की थी। यही सात अजूबे लगभग 2100 सालों तक दुनिया में प्रचलित रहे। लेकिन 1999 में इसमें बदलाव करने की बात चली क्योंकि पुराने अजूबों में अधिकांश टूट-फूट चुके थे।

उस समय के सात अजूबे  थे (7 Wonders of the Old World )

    • ग्रेट पिरामिड ऑफ़ गिज़ा The Great Pyramid of Giza
    • हैंगिंग गार्डन ऑफ़ बेबीलोन Hanging Gardens of Babylon
    • स्टेचू ऑफ़ ज़ीउस अट ओलम्पिया Statue of Zeus at Olympia
    • टेम्पल ऑफ़ आर्टेमिस The Temple of Artemis
    • माउसोलस का मकबरा  Mausoleum at Halicarnassus
    • कोलोसुस ऑफ़ रोडेज Colossus of Rhodes
    • लाइटहाउस ऑफ़ अलेक्सान्दिरा Lighthouse of Alexandria

इन सात अजूबों में सिर्फ अभी ग्रेट पिरामिड ऑफ़ गिज़ा बचा हुआ है और इसे अब एक 7 अजूबों से अलग एक विशेष स्थान दिया गया है. बाकि सभी अब नष्ट हो चुके है ।

दुनिया के सात नए अजूबे लाने का विचार 1999 में आया थानए अजूबों को चुनने के लिए स्विट्ज़रलैंड के ज्यूरिक में न्यू 7 वंडर फाउंडेशन बनाया गया। इन्होने कैनेडा में एक साईट बनवाई, जिसमें विश्व भर की 200 कलाकृति के बारे में जानकारी थी, और एक पोल शुरू हुआ, जिसमें इन 200 एंट्री में से 7 एंट्री को चुनना था। न्यू 7 वंडर फाउंडेशन के अनुसार इस परियोजना में लगभग 100 मिलियन लोगों ने नेट एवं फोन के द्वारा अपना वोट दिया. इन्टरनेट के द्वारा एक इन्सान एक ही बार 7 अजूबे चुन कर वोट कर सकता था, लेकिन फ़ोन के द्वारा एक इन्सान कई वोट दे सकता था. वोटिंग 2007 तक चली थी, जिसका रिजल्ट 7 जुलाई 2007 को लिस्बन में सबसे सामने आया ।

अजूबा का नाम निर्माण जगह
चीन की दीवार(The Great Wall of China) सातवी BC शताब्दी में चीन
पेट्रा(Petra) 100 BC जोर्डन
ताजमहल(TajMahal) 1648 भारत
क्राइस्ट रिडीमर(Christ the Redeemer) 1931 ब्राजील
माचू पिच्चु (Machu Picchu) AD 1450 पेरू
रोम का कोलोसियम (Roman Colosseum) AD 80 इटली
चिचेन इत्ज़ा (Chichen Itza Pyramid) AD 600 मैक्सिको

चीचेन इट्ज़ा पिरामिड मेक्सिको (Chichen Itza Pyramid)

chichenitzapyramid-dainikstoriesदुनिया के 7 अजूबे में से यह पहला अजूबा है। चिचेन इट्ज़ा कैनकन के पश्चिम में 200 किलोमीटर की दूरी पर युकाटन राज्य में स्थित है और यह मेक्सिको के सबसे संरक्षित पुरातात्विक स्थलों में से एक है। इट्ज़ा जातीय-वंश समुदाय का नाम है जिसने स्पेनिश विजय से पहले मैक्सिको के उत्तरी प्रायद्वीप पर शासन किया था। चिचेन इट्ज़ा नाम का मतलब होता है कुएं के किनारे। हर साल लगभग 1.2 मिलियन लोग चिचेन इट्ज़ा पर्यटन स्थल की यात्रा करते हैं। यह एक पुरातत्व स्थल है जो इतिहास के साथ ही विभिन्न डिजाइनों और शैलियों से समृद्ध है। यह पिरामिड संरचना अपने डिजाइन के साथ-साथ कैलेंडर निर्माण के लिए भी असाधारण है। इसका सबसे बड़ा रहस्य साल में दो बार सांप की आकृति बनाते हुए पिरामिड पर एक छाया का गिरना हर किसी को हैरान कर देता है। चिचेन इट्ज़ा में आकर्षण का केंद्र पिरामिड एल कैस्टिलो है।

क्राइस्ट रिडीमर (Christ the Redeemer)

ChristtheRedeemer-dainikstoriesक्राइस्ट द रिडीमर ब्राज़ील में जीसस क्राइस्ट की एक आर्ट डेको मूर्ति है जिसको पोलिश-फ्रांसीसी मूर्तिकार पॉल लैंडरोस्की द्वारा बनाई गई है। क्राइस्ट द रिडीमर दुनिया के सात अजूबों में शामिल है। इस मूर्ति को फ्रांसीसी इंजीनियर अल्बर्ट कैक्वॉट की मदद से इसको ब्राजील के इंजीनियर हेइटर दा सिल्वा कोस्टा द्वारा बनाया गया है। इस मूर्ति चेहरा रोमानियाई कलाकार घोरघे लिओनिडा बनाया गया था। इस प्रतिमा की लम्बाई 30 मीटर (98 फीट) लंबी है जिसमें 8-मीटर (26 फीट) पेडेस्टल शामिल नहीं है और इस मूर्ति की बाहें 28 मीटर चौड़ी हैं। इस मूर्ति की स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी की उंचाई की दो तिहाई है।
यह मूर्ति 635 मीट्रिक टन बजनी है और यह यह रियो के शहर में तिजुका फॉरेस्ट नेशनल पार्क में 700-मीटर (2,300 फीट) ऊँचे कोरकोवाडो पर्वत के शिखर पर स्थित है। यह मूर्ति दुनिया भारत में इसाई धर्म का प्रतीक मानी जाती है इसके साथ ही यह रियो डी जनेरियो और ब्राजील दोनों के लिए एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गई। यह मूर्ति प्रबलित कंक्रीट और सोपस्टोन से बनी हुई है और इसका निर्माण 1922 और 1931 के बीच किया गया है।

चीन की दिवार (The Great Wall of China)

wallofchina - dainikstoriesचीन की विशाल दीवार मिट्टी और पत्थर से बनी एक किलेनुमा दीवार है जिसे चीन के विभिन्न शासको के द्वारा उत्तरी हमलावरों से रक्षा के लिए पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर सोलहवी शताब्दी तक बनवाया गया। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की इस मानव निर्मित ढांचे को अन्तरिक्ष से भी देखा जा सकता है। यह दीवार 6,400 Km के क्षेत्र में फैली है। इसका विस्तार पूर्व में शानहाइगुआन से पश्चिम में लोप नुर तक है और कुल लंबाई लगभग 6700 Km है। हालांकि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के हाल के सर्वेक्षण के अनुसार समग्र महान दीवार, अपनी सभी शाखाओं सहित 8,851.8 Km (5,500.3 Mile ) तक फैली है।अपने उत्कर्ष पर मिंग वंश की सुरक्षा हेतु 10 लाख से अधिक लोग नियुक्त थे।यह अनुमानित है, कि इस महान दीवार निर्माण परियोजना में लगभग 20 से 30 लाख लोगों ने अपना जीवन लगा दिया था।

जॉर्डन का पेट्रा (Petra)

petra-dainikstories6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से पेट्रा नाबातियन साम्राज्य की प्रभावशाली राजधानी थी। जिसके बाद साम्राज्य 106 ईस्वी में रोमन साम्राज्य में अवशोषित हो गया था और रोमनों ने शहर का विस्तार जारी रखा। व्यापार और वाणिज्य के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र, पेट्रा ने तब तक विकास जारी रखा जब तक कि एक विनाशकारी भूकंप ने इमारतों को नष्ट नहीं किया और छाठी सताब्दी में मुसलमानो पेट्रा जीत लिया लेकिन मुसलमानो अधीन ज्यादा समय तक नहीं रहा था। इसके बाद 1189 ईस्वी में मध्य पूर्व के मुस्लिम सुलतान सलादिन की विजय के बाद पेट्रा को ईसाइयो ने त्याग दिया।

ट्रांस-जॉर्डन के गठन के बाद स्थल की पहली वास्तविक खुदाई 1929 ईस्वी में गई थीं। उस समय से, पेट्रा 1989 में स्टीवन स्पीलबर्ग फिल्म, इंडियाना जोन्स और लास्ट क्रूसेड द्वारा एक्सपोजर के कारण आंशिक रूप से जॉर्डन के सबसे बड़े पर्यटक आकर्षण बन गया हैं। पेट्रा के शानदार इंजीनियरिंग उपलब्धियों और अच्छी तरह से संरक्षित आयाम के कारण, पेट्रा, को पुरातात्विक स्थल जुलाई 2007 में दुनिया के नए सात आश्चर्यों में से एक के रूप में चुना गया थी।

ताज महल (TAJMAHAL)

TAJMAHAL-DAINIKSTORIESभारत की शान ताजमहल भी दुनिया के सात अजूबों में से एक है. अपनी खूबसूरत कलाकारी, आकृति की वजह से इसे अजूबा बोला गया था. ताजमहल का निर्माण 1632 में शाहजहाँ द्वारा करवाया गया था.भारत के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मक़बरा है।प्यार एक ऐसी एहसास हैं जिससे खूबसूरत कुछ नही होता हैं, और इसी खूबसूरती को इमारत की शक्ल दी भारत के मुगल बादशाह शाहजहाँ ने. जिन्होने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में ताजमहल बनवाया था।सफ़ेद संगमरमर का बना ये मकबरा, पूरी तरह से सफ़ेद है, जिसके चारों ओर बगीचा है, एवं सामने पानी की बारी है. ताजमहल भारत के आगरा शहर में स्थित है. इस जैसे सुंदर कलाकृति दुनिया में और कही देखने को नहीं मिलेगी. मुग़ल शासक शाहजहाँ ने जब इसे बनवाया था, और इसे बनाने के बाद राजा ने निर्माण से जुड़े सभी मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे, ताकि वे ऐसा कुछ दूसरा न बना सके.

रोम का कोलोसियम (Roman Colosseum)

romancolosseum-dainikstoriesरोम के इटली में बसा ये एक विशाल स्टेडियम है. रोम में देखने के लिए ये मुख्य आकर्षण है. इसका निर्माण 72 AD में शुरू हुआ था, जो 80 AD में पूरा हुआ था. ओवल शेप की ये विशाल आकृति, कंक्रीट व् रेत से बनाई गई थी. इतनी पुरानी ये वास्तुकला आज भी दुनिया के सात अजूबों में अपनी जगह बनाये हुए है. प्राकतिक आपदा, भूकंप से ये थोडा बहुत ध्वस्त हुआ, लेकिन आज भी इसकी विशालता वैसे ही है. यहाँ 50 हजार से 80 हजार लोग बैठ सकते है. यहाँ जानवरों की लड़ाई, खेल कूद, संस्कृतिक कार्यक्रम होते है. यह 24 हजार वर्गमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. इस जैसी आकृति को बनाने की कोशिश कई इंजिनियरों द्वारा की गई, लेकिन ये एक तरह की पहेली है, जिसे आज तक कोई सुलझा पाया है.

माचू पिच्चू (Machu Picchu)

MachuPicchu-dainikstories

माचू पिच्चू दक्षिण अमेरिकी देश पेरू मे स्थित एक कोलम्बस-पूर्व युग, इंका सभ्यता से संबंधित ऐतिहासिक स्थल है। यह समुद्र तल से 2,430 मीटर की ऊँचाई पर उरुबाम्बा घाटी, जिसमे से उरुबाम्बा नदी बहती है, के ऊपर एक पहाड़ पर स्थित है। यह कुज़्को से 80 किलोमीटर (50 मील) उत्तर पश्चिम में स्थित है। इसे अक्सर “इंकाओं का खोया शहर “ भी कहा जाता है। माचू पिच्चू इंका साम्राज्य के सबसे परिचित प्रतीकों में से एक है।

1430 ई. के आसपास इंकाओं ने इसका निर्माण अपने शासकों के आधिकारिक स्थल के रूप में शुरू किया था, लेकिन इसके लगभग सौ साल बाद, जब इंकाओं पर स्पेनियों ने विजय प्राप्त कर ली तो इसे यूँ ही छोड़ दिया गया। हालांकि स्थानीय लोग इसे शुरु से जानते थे पर सारे विश्व को इससे परिचित कराने का श्रेय हीरम बिंघम को जाता है जो एक अमेरिकी इतिहासकार थे और उन्होने इसकी खोज 1911 में की थी, तब से माचू पिच्चू एक महत्वपूर्ण पर्यटन आकर्षण बन गया है।

माचू पिच्चू को 1981 में पेरू का एक ऐतिहासिक देवालय घोषित किया गया और 1983 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल की दर्जा दिया गया। क्योंकि इसे स्पेनियों ने इंकाओं पर विजय प्राप्त करने के बाद भी नहीं लूटा था, इसलिए इस स्थल का एक सांस्कृतिक स्थल के रूप में विशेष महत्व है और इसे एक पवित्र स्थान भी माना जाता है।

दी ग्रेट पिरामिड ऑफ़ गिज़ा सबसे बड़ा और सबसे पुराना पिरामिड है, जो आज तक इस दुनिया में प्राचीनकाल से मौजूद है. इसलिए इसे एक विशेष सम्मान के तौर पर स्थान प्राप्त है, और 7 वंडर्स के अलावा इसका नाम भी लिया जाता है।

प्राचीन मिस्र के कुफू पिरामिड को महान गीजा पिरामिड के नाम से जाना जाता है. इसकी लंबाई 481 फुट (146 मीटर) है। यह पिरामिड 2560 ईसा पूर्व के करीब बनवाया गया था। यह 3, 800 सालों से दुनिया की सबसे ऊंची बनावट है। इसमें 2.3 मिलियन लाइमस्टोन ब्लॉक्स और ग्रेनाइट पत्थर लगे हैं। सबसे बड़ा ग्रेनाइट पत्थर राजा के चैम्बर में मिला था जिसका वजन 25 से 80 टन है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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