Paytm Founder – विजय शेखर शर्मा की सफलता की कहानी

विजय शेखर शर्मा (Vijay Shekhar Sharma) का जन्‍म उत्‍तर प्रदेश के अलीगढ जिले के एक छोटे से गॉव विजयगढ़ में 8 जुलाई 1973 को हुआ था। विजय शेखर शर्मा एक middle class परिवार से थे।

विजय शेखर शर्मा (Vijay Shekhar Sharma) का जन्‍म उत्‍तर प्रदेश के अलीगढ जिले के एक छोटे से गॉव विजयगढ़ में 8 जुलाई 1973 को हुआ था। विजय शेखर शर्मा एक middle class परिवार से थे।इनकी माता जी हाउसवाइफ थीं और पिता जी एक बेहद ईमानदार स्कूल टीचर थे, जो ट्यूशन पढ़ाने को भी अनैतिक मानते थे, और  दादाजी काफी नामी- गिरामी व्यक्ति थे। उनके नाम पर विजयगढ़ में स्कूल था।

विजय की प्रारम्भिक शिक्षा विजयगढ़ के एक साधारण से हिंदी मीडियम स्कूल में हुई। पढने में मेधावी विजय हमेशा अपनी क्लास में फर्स्ट आते थे  उच्‍च शिक्षा के लिये विजय ने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया, यहॉ उनके आडें आयी अंग्रेजी, चूंकि वह हिंदी मीडियम स्‍कूल से पढें थे, इसलिये अंग्रेेजी न आने की वजह से यहॉ उन्‍हें बहुत परेशानी का सामना करना पडा, विजय हताश होने लगे वे classes bunk करने लगे, कई बार घर वापस लौटने का विचार भी उनके मन में आय, पर वे टिके रहे | विजय ने ठान लिया कि वे पहले अंग्रेजी को काबू में करेंगे, डिक्शनरी से हिंदी को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके पढ़ते थे। इंग्लिश किताबों, मैगजीन्स और दोस्तों की मदद से विजय फर्राटे से अंग्रेजी बोलना सीख गए।

विजय Hotmail के founder Sabeer Bhatia से inspire होकर Internet के क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहते थे। उन्होंने किताबों से पढ़-पढ़ कर कोडिंग सीखी और खुद का एक content management system (CMS) तैयार कर दिया, जिसे आगे चल कर The Indian Express सहित किये सारे बड़े अखबार प्रयोग करने लगे।

विजय ने पढ़ाई के दौरान ही अपने एक दोस्त के साथ मिलकर बिज़नेस शुरू कर दिया था, फिर बाद में उसे अमेरिकन कंपनी लोटस इंटरवर्क्स ( Lotus Interworks) को बेच दिया और अपनी ही कंपनी में नौकरी करने लग गये , पर दूसरों की नौकरी करना विजय शेखर शर्मा को पसंद नहीं आया और उन्होंने जल्द ही नौकरी छोड़ दी। लेकिन बिजनेस का स्वाद चख चुके शेखर भला खाली कैसे बैठते, उनका दिमाग तुरंत नए business ideas खोजने में लग गया और इसके बाद उन्होंने अपनी एक नई कंपनी शुरू की जिसका नाम था One97, लेकिन यह ठीक से नहीं चल पायी, सालभर में उन्‍हें काफी घाटा झेेलना पडा, हालत इतनी खराब हो गयी कि एक-एक पैसे बचाने के लिए उन्‍हें काफी मेहनत करनी पडती थी. बस का किराया बचाने के लिये वह पैदल चलते थे. कभी-कभी पूरा दिन सिर्फ दो प्याली चाय पर ही गुजर जाता था, यहां तक की उनसे कोई शादी करने को भी तैयार नहीं था, इस बीच वह लोगों के घर जाकर कंप्‍यूटर रिपेयर (Computer Repair) करने का काम करते थे, इस कठिन समय में इनके दोनों partners  भी One97  छोड़ कर चले गए| विजय नयी दिल्ली में कश्मीरी गेट के पास एक सस्ते से हॉस्टल में रहने लगे।

Paytm के शुरू होने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। किराने का सामान या ऑटोवाले को पैसे देते वक्त छुट्टे की दिक्कत ने उनको Paytm जैसी कंपनी बनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रारंभिक दौर में यह DTH recharge और prepaid mobile recharge के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही थी। फिर Paytm ने धीरे-धीरे अपनी services बढ़ानी शुरू की। पहले बिजली बिल, गैस का बिल payment की सुविधा दी और फिर Paytm ने अन्य e-commerce कंपनियों की तरह सामान बेचना शुरू कर दिया। और 2016 में हुए note ban ने तो PayTM के लिए lottery का काम किया और देखते-देखते PayTM करोड़ों लोगों की ज़रुरत बना गया।

आज Paytm भारत की सबसे लोकप्रिय online payment site है ।  Paytm की कीमत आज 20 हजार करोड़ से ज्यादा है। कई हजार लोग इस कंपनी में काम करते हैं। विजय शेखर शर्मा की मेहनत और हार ना मानने का उनका जज्बा ही  इस कंपनी के इतने सफल होने का कारण है।

विजय शेखर शर्मा हर उस भारतीय के लिए आदर्श है जो अपनी मेहनत से कुछ बनना चाहता है क्योकि यह उस इन्सान की कहानी है जिसने Successful होने का सपना तब देखा था जब उसकी जेब में खाना खाने के लिए 10 रूपये भी नहीं थे।

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